प्रयागराज। प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन से धरने पर बैठे ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज की शुक्रवार को तबीयत बिगड़ गई। जानकारी के अनुसार उन्हें बुखार आ गया है। शंकराचार्य बीते 6 दिनों से धरने पर बैठे हैं और फिलहाल अपने वैन में आराम कर रहे हैं। उनकी तबीयत खराब होने की सूचना मिलते ही शिष्यों और समर्थकों में चिंता का माहौल बन गया है। वहीं प्रशासन भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।
बताया जा रहा है कि शंकराचार्य दिन में केवल दो बार पालकी पर बाहर आए, इसके बाद उन्होंने आराम करना शुरू कर दिया। मौनी अमावस्या के दिन प्रशासन के रवैये से नाराज शंकराचार्य अभी तक अपने शिविर में वापस नहीं लौटे हैं।वसंत पंचमी के दिन यह विवाद किस तरह सुलझेगा, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
माफी तक स्नान से इनकार
इससे पहले शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने स्पष्ट किया था कि जब तक प्रशासन माफी नहीं मांगता, तब तक वे वसंत पंचमी का स्नान नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि मौनी अमावस्या के दिन उन्हें पालकी में संगम स्नान के लिए आगे बढ़ने से रोका गया और इस दौरान उनके शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की हुई, जिसके बाद उन्होंने धरना शुरू कर दिया। विवाद को समाप्त कराने के लिए उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी शांति बनाए रखने की अपील की है।
सवा लाख शिवलिंगों की स्थापना से जुड़ा मामला
बताया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ के लक्षेश्वर धाम में सवा लाख शिवलिंगों की स्थापना प्रस्तावित है। इस स्थापना से पहले शंकराचार्य द्वारा इन शिवलिंगों को प्रयागराज की धरती पर लाकर श्रद्धालुओं के दर्शन और विधिवत पूजन की योजना थी। लेकिन मौजूदा स्थिति में शंकराचार्य शिविर से बाहर हैं, जबकि शिविर में रखे शिवलिंग पूजन और साधना की प्रतीक्षा में हैं।
सूत्रों के अनुसार सवा लाख में से कुछ शिवलिंग ही प्रयागराज पहुंच सके हैं, जबकि शेष कार्टूनों में पैक होकर रखे हैं। एक और खेप के आने की भी बात कही जा रही है। शिवलिंगों को इस स्थिति में देखकर कई श्रद्धालु नाराजगी भी जता रहे हैं।
संत समाज की अपील: शांति और संवाद से निकले समाधान
इस पूरे घटनाक्रम के बीच संत समाज की ओर से शांति और संयम बरतने की अपील की गई है। नासिक के संत महंत रामस्नेही दास और महंत बैजनाथ ने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों का समाधान टकराव से नहीं, बल्कि सम्मानजनक बातचीत और आपसी समझ से होना चाहिए।
भतीजे जयराम पांडेय का आरोप: सरकार माफी मांगे, प्रशासन का रवैया दुर्भाग्यपूर्ण
प्रतापगढ़ जनपद की पट्टी तहसील स्थित बाभनपुर में शंकराचार्य के परिजनों ने भी सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई है। परिजनों का कहना है कि यदि सरकार माफी मांग ले तो स्थिति सुधर सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि लगातार अनशन के चलते स्वामी जी का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है।
शंकराचार्य के भतीजे जयराम पांडेय ने बताया कि वे मौनी अमावस्या के दिन मौके पर मौजूद थे। उनके अनुसार ऐसी कोई घटना नहीं हुई थी, जिसके कारण स्वामी जी पर रोक लगाई जाती। उन्होंने मेला प्रशासन के आरोपों को निराधार बताते हुए इसे साजिश करार दिया और कहा कि प्रशासन का अड़ियल रवैया दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि शंकराचार्य माघ मेले में स्नान के लिए गए थे और स्नान न कर पाना आस्था पर आघात है। लगातार अनशन के कारण उनकी तबीयत बिगड़ रही है, जिससे परिवार भी चिंतित है।
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