चेटी चंड महोत्सव 2026 की तैयारियाँ तेज, 15 मार्च को वहां आमंत्रण रैली, 18 मार्च को निकलेगी विशाल झूलेलाल शोभायात्रा
झूलेलाल बेड़ा ही पार : आस्था और उत्सव का संदेश
Live Story Time, Agra, Uttar Pradesh, India, Bharat. 8सिंधी समाज के आराध्य भगवान झूलेलाल की जयंती के उपलक्ष्य में चेटी चंड महोत्सव 2026 को लेकर आगरा में तैयारियाँ तेज हो गई हैं। इस बार महोत्सव को और भी भव्य बनाने की तैयारी की गई है। सिन्धी सेन्ट्रल पंचायत, आगरा (स्थापित 1956) के तत्वावधान में यह आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम की खास बात यह है कि सिंधी सेन्ट्रल पंचायत के अध्यक्ष चन्द्रप्रकाश सोनी ने इस वर्ष समाज से चंदा न लेने की घोषणा की है, जिसे समाज में सेवा और पारदर्शिता की मिसाल माना जा रहा है।
18 मार्च को निकलेगी भव्य शोभायात्रा
चेटी चंड महोत्सव के अंतर्गत 18 मार्च 2026, बुधवार को भगवान झूलेलाल की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। शोभायात्रा का उद्घाटन समारोह सांय 3 बजे हरियाली वाटिका में आयोजित होगा। इसके बाद सांय 3:30 बजे ताज प्रेस क्लब से शोभायात्रा का शुभारम्भ किया जाएगा। यह शोभायात्रा शहर के प्रमुख मार्गों घाटिया आज़म खाँ, फुलट्टी, सिन्धी बाजार, फुब्बारा, किनारी बाजार, पवन मार्केट, जौहरी बाजार और दरेसी से होती हुई हाथीघाट पर समाप्त होगी। पूरे मार्ग में भक्तजन भगवान झूलेलाल के जयकारों के साथ श्रद्धा और उत्साह का प्रदर्शन करेंगे।
15 मार्च को वाहन आमंत्रण यात्रा रैली
महोत्सव की शुरुआत 15 मार्च 2026, रविवार को वाहन आमंत्रण यात्रा रैली से होगी। यह रैली एफ-42, सिन्धु भवन, कमला नगर, आगरा से प्रातः 9:30 बजे प्रारम्भ होकर श्री सोमनाथ धाम मंदिर (मणि), शाहगंज, आगरा पर समाप्त होगी। इस रैली के माध्यम से पूरे शहर में चेटी चंड महोत्सव का संदेश दिया जाएगा और लोगों को शोभायात्रा में शामिल होने का आमंत्रण दिया जाएगा।

पंचायत के पदाधिकारियों की जिम्मेदारियाँ
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने के लिए सिन्धी सेन्ट्रल पंचायत, आगरा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
पंचायत के अध्यक्ष चन्द्रप्रकाश सोनी और महामंत्री हेमन्त भोजवानी के नेतृत्व में तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं।
मेला संयोजक नन्दलाल आयलानी तथा मेला सह संयोजक डॉ. एस. के. विरानी कार्यक्रम की संपूर्ण व्यवस्था संभाल रहे हैं।
संरक्षक के रूप में श्यामलाल रंगनानी मार्गदर्शन दे रहे हैं।
वरिष्ठ उपाध्यक्ष घनश्याम दास देवनानी तथा कोषाध्यक्ष परमानन्द आतवानी वित्तीय व्यवस्था की देखरेख कर रहे हैं।
उपाध्यक्ष के रूप में जयराम दास होतचंदानी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
वरिष्ठ सलाहकार श्याम भोजवानी संगठन को अनुभव और मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं।
ऑडिटर के रूप में अशोक पारवानी कार्य कर रहे हैं।
उपाध्यक्षों में जगदीश डोडानी, दौलतराम खूबनानी, नरेन्द्र पुरसनानी और भोजराज लालवानी शामिल हैं।
कानूनी सलाहकार के रूप में महेश सोनी (एडवोकेट) और लालचन्द मोटवानी (एडवोकेट) सेवाएँ दे रहे हैं।
मीडिया प्रभारी मेघराज दियालानी तथा सह मीडिया प्रभारी कमल जुम्मानी प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
संगठन मंत्री के रूप में परषोत्तम लछवानी, जयप्रकाश धर्माणी, कन्हैया लाल मानवानी और राजू खेमानी सक्रिय हैं।
सलाहकारों में वासुदेव ग्यामलानी, लाल एम सोनी, रमेश कल्याणी और भजन लाल प्रधान शामिल हैं।
सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी मोन्टू कारीरा, प्रदीप वनवारी और नरेश लखवानी संभाल रहे हैं।
समाज में उत्साह और तैयारी का माहौल
चेटी चंड महोत्सव को लेकर सिंधी समाज में जबरदस्त उत्साह दिखाई दे रहा है। समाज के लोग इसे अपनी संस्कृति, आस्था और एकता का पर्व मानते हैं। हर वर्ष की तरह इस बार भी झांकियों, भजनों और धार्मिक आयोजनों के साथ यह पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा।
संपादकीय : चन्द्रप्रकाश सोनी का निर्णय समाज सेवा की नई मिसाल
किसी भी सामाजिक संगठन के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है — पारदर्शिता, विश्वास और सेवा का भाव। आज के दौर में जब अधिकतर आयोजनों में चंदा और आर्थिक सहयोग पर जोर दिया जाता है, ऐसे समय में सिन्धी सेन्ट्रल पंचायत, आगरा के अध्यक्ष चन्द्रप्रकाश सोनी द्वारा चंदा न लेने की घोषणा वास्तव में एक प्रेरक और साहसिक निर्णय है।
यह निर्णय केवल आर्थिक व्यवस्था का प्रश्न नहीं है, बल्कि यह समाज को यह संदेश देता है कि सेवा का उद्देश्य दिखावा नहीं, बल्कि समर्पण होना चाहिए। जब नेतृत्व स्वयं जिम्मेदारी उठाता है तो समाज में विश्वास और एकता दोनों मजबूत होते हैं।
सिंधी समाज सदियों से सहयोग, सेवा और संस्कृति की परंपरा के लिए जाना जाता है। ऐसे में यदि कोई संगठन बिना चंदा लिए भी इतने बड़े आयोजन को सफल बनाने का संकल्प लेता है, तो यह अन्य सामाजिक संगठनों के लिए भी एक प्रेरक उदाहरण बन सकता है।
चन्द्रप्रकाश सोनी का यह निर्णय बताता है कि सच्चा नेतृत्व वही है जो समाज से लेने के बजाय समाज को देने की सोच रखता है। यदि देश के अन्य सामाजिक और धार्मिक संगठन भी इस प्रकार पारदर्शिता और आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाएँ, तो समाज में विश्वास की नई नींव रखी जा सकती है।
यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि यह निर्णय केवल एक आयोजन की व्यवस्था नहीं, बल्कि सामाजिक नेतृत्व की नई संस्कृति की शुरुआत है।
डॉ भानु प्रताप सिंह, संपादक