आगरा की कुटुंब संस्था ने चैत्र माह से प्रारंभ हिंदी तिथियों के साथ सनातन (तिथि) कैलेंडर विक्रम संवत २०८३ प्रकाशित कर कीर्तिमान बनाया
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आगरा में हिंदी और सनातन परंपरा का नया कीर्तिमान
अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक अरविंद जी महाराज के बैग में पहुंचा कैलेंडर, विदित को वेद विदित बताया
हमारे ऋषियों के हजारों वर्षों के ज्ञान का प्रतिफल है सनातन कैलेंडर: राकेश गर्ग
आगरा को ताज नगरी के स्थान पर सेवानगरी और धर्मनगरी के रूप में पहचान मिली: सुनील विकलडॉ
भानु प्रताप सिंह
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आगरा। हिंदी भाषा के उत्थान के लिए आगरा वालों ने अनेक कीर्तिमान बनाए हैं। इसी क्रम में एक कीर्तिमान और बना है। भारत में पहली बार हिंदी पंचांग चैत्र माह से प्रारंभ हिंदी तिथियों के साथ सनातन (तिथि) कैलेंडर विक्रम संवत २०८३ आगरा की कुटुंब संस्था ने प्रकाशित किया है। इस सनातन कैलेंडर का विमोचन भी अपने आप में एक कीर्तिमान की तरह है। समारोह में आगरा की खास शख्सियत आईं। स्थान कम पड़ गया। सनातन धर्म पर केंद्रित सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने वातावरण को सनातनमय बना दिया।
अब तक हिंदी तिथियां के कैलेंडर 1 जनवरी से बनाए जाते हैं। यह यह पहली बार है कि कैलेंडर सनातन नव संवत्सर के प्रथम दिन से प्रकाशित किया गया है। कैलेंडर में हिंदी तिथियां हिंदी अंकों के साथ अंकित हैं। अंग्रेजी तारीख है भी दी गई हैं लेकिन प्रमुखता हिंदी तिथियों को है।
इस कैलेंडर के प्रकाशित होने पर अभिभूत अंतरराष्ट्रीय तथा वाचक राष्ट्र धर्म का पूरी दुनिया में प्रचार कर रहे आगरा के निवासी अरविंद जी महाराज ने अपनी बात जय सियाराम का उद्घोष करते हुए कुछ इस तरह कही, कैलेंडर से मेरा व्यक्तिगत फायदा है।ये सनातन कैलेंडर बनाना बहुत मंगल काम है। इसे निःशुल्क नहीं, शुल्क रखो। यह कैलेंडर हर घर में हो। पूरा देश सिलेंडर में लगा है तब आप कैलेंडर में लगे हो। इस कैलेंडर को अपने बैग में रखूंगा। उन्होंने कुटुंब संस्था के संयोजक और कार्यक्रम के सर्वेसर्वा विदित सिंघल को वेद विदित बताया।

समारोह का शुभारंभ करते अतिथि।अरविंद जी महाराज ने कहा कि आगरा प्यारी भूमि है। यहां आने से पहले पूरे देश का भ्रमण किया। धार्मिक भूमि के कारण आगरा में आश्रम बनाया। धार्मिक कार्यक्रम सर्वाधिक आगरा में होते हैं। कॉन्वेंट स्कूलों में पढ़ाई विधा के लिए ही, शिक्षा के लिए तो सनातन ही है। कोरोना से खराब समय चल रहा है। आप यंत्र बना सकते हैं, मंत्र की सामर्थ्य सनातन में है, जिससे विकास होता है। उन्होंने स्वामी रामतीर्थ के साथ जापान देश में एक ट्रेन में हुई घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि देश को सर्वोपरि रखना चाहिए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम के अध्यक्ष, प्रसिद्ध समाजसेवी राकेश गर्ग ने कहा, सनातन कैलेंडर प्रकाशित करना ऐतिहासिक प्रयास है। 2082 वर्ष पूर्व ये कैलेंडर पूर्व ऐसे ही नहीं बन गया होगा। ये हजारों साल पहले हमारे ऋषि मुनियों का ज्ञान है। जब समाज ने संस्कारों से जीना सिखा, तब सनातन धर्म का पहला कैलेंडर बना है। हजारों साल पहले से हमें सूर्यग्रहण चंद्रग्रहण का समय पता था। ये सिर्फ तिथियों का कैलेंडर नहीं है। विश्व का कल्याण केवल सनातन धर्म ही कर सकता है। ये अभियान पूरे देश में चले। विद्याभारती के स्कूलों में आपकी बात पहुंचाएंगे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जाने माने समाज सेवी सुनील विकल ने इस समारोह को दिव्य कार्यक्रम बताया। उन्होंने कहा कि आगरा का सौभाग्य के राष्ट्र संत का सानिध्य मिल रहा है। आगरा को ताजनगरी के स्थान पर धर्मनगरी और सेवा नगरी के रूप में पहचान मिली है। ये कैलेंडर हिंदू नववर्ष से शुरू हो रहा है। भारतीय कैलेंडर वैज्ञानिक आधार पर है।

ज्योतिषा मित्तल ने कुटुंब संस्था के दो वर्ष के कार्यकलापों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य परिवारों को मंच पर लाना, सनातन संस्कृति और मानवीय मूल्यों को सुरक्षित रखना है। चित्रांकन, मां बच्चा फैशन शो, मनोरंजन मेला, निरंतर गौसेवा, रक्तदान शिविर, मकर संक्रांति दान मेला जैसे कार्यक्रम किए हैं। परिवार एकजुट तो संस्कृति जीवित रहती है।
तपस्या सिंह ने कैलेण्डर के बारे में जानकारी देते हुए कहा, सनातन संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों की सुरक्षित रखने का संकल्प है। सनातन परंपरा को याद दिलाना है। ये कैलेंडर सनातन संस्कृति को घर घर पहुंचाने का काम करेगा। नई पीढ़ी को सनातन से अवगत कराने का भी उद्देश्य है। उस वर्ष 2000 कैलेंडर प्रकाशित कराए हैं। अगले वर्ष वर्ष यह संख्या 10000 तक पहुंच सकती है। हम शीघ्र ही 4 से 12 वर्ष तक के बच्चों के लिए सनातन संस्कार शिविर लगाएंगे।अनुष्का गुप्ता, नायशा जिंदल आधुनिक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। कवयित्री एवं साहित्यकार नूतन अग्रवाल नूतन ने कार्यक्रम का शानदार संचालन किया। अतिथियों का स्वागत पटका और चंदन तिलक के साथ किया गया। आयोजनों की आशा से अधिक संख्या हो गई इस कारण बाद में कुर्सियां अलग से रखवानी पड़ी।

कुटुंब संस्था के संयोजक विदित सिंघल का कहना है “सनातन (तिथि) कैलेंडर, विक्रम संवत 2083” केवल तिथियों का संकलन नहीं है, बल्कि हमारी सनातन संस्कृति, परम्पराओं और जीवन मूल्यों से जुड़ने का एक छोटा सा प्रयास है, जिससे हम और आने वाली पीढ़ियाँ अपनी जड़ों से जुड़ी रहें।
हमारी सनातन परंपरा में तिथि, पक्ष, मास और विक्रम संवत का अत्यंत विशेष महत्व रहा है। इन्हीं के आधार पर हमारे पर्व, व्रत, उत्सव और धार्मिक परंपराएँ निर्धारित होती रही हैं।
समय के साथ-साथ आधुनिक जीवनशैली में हममें से अधिकांश लोग केवल ग्रेगेरियन कैलेंडर का ही उपयोग करने लगे हैं, और धीरे-धीरे हमारी सनातन तिथि परंपरा से दूरी बढ़ती जा रही है। इसी विचार के साथ कुटुंब संस्था ने एक छोटा-सा प्रयास किया है — “सनातन (तिथि) कैलेंडर” के माध्यम से। हमारा उद्देश्य किसी को कुछ सिखाना या समझाना नहीं है, बल्कि बस अपनी सनातन परंपरा की याद दिलाना है।

हम चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ी भी यह जाने कि हमारे पर्व किस तिथि पर आते हैं, हमारे महीनों के नाम क्या हैं, और हमारी परंपराओं की जड़ें कितनी समृद्ध और गहरी हैं।
हमारा उद्देश्य किसी पर्व की सटीक तिथि बताने का दावा करना भी नहीं है, बल्कि बस इतना है कि लोगों को हमारी मूल परंपराओं से परिचित कराया जा सके और विशेष रूप से नई पीढ़ी को इन मूल बातों से अवगत कराया जा सके। क्योंकि यह केवल एक कैलेंडर नहीं है — यह एक छोटा-सा प्रयास है अपनी संस्कृति को याद रखने का,अपनी जड़ों से जुड़े रहने का और सनातन को घर-घर तक पहुँचाने का।

इस अवसर पर समाज के अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे, जिनमें डॉक्टर साहब मुनीश्वर गप्ता, मुकेश गर्ग प्रकाश जनरेटर, पार्षद भरत, वीरेंद्र वाष्र्णेय, मनीष अग्रवाल रावी, ज्योतिषवेत्ता डॉ महेश पाराशर, श्रुति सिन्हा, मयंक अग्रवाल, रविकांत चावला, सुनील शर्मा, पंकज गोयल, विकास अग्रवाल, रिंकू अग्रवाल, प्रशांत मित्तल, भारत महाजन, शिशांक तिवारी, कुंती चौहान, भरत शर्मा, बबिता पाठक,हर्षित पचौरी, कमलेश गर्ग, मनीष रावी, मुकेश गर्ग, अंकुर अग्रवाल, प्रिय रंजन शर्मा, सोनिका चौहान, अतुल अग्रवाल, राकेश जैन, युगल सिंघल, नीरज अग्रवाल, प्रमोद सारस्वत, अम्बुज अग्रवाल, करन गर्ग, शिल्पी अग्रवाल, मोनिका गार्डवाल, शलिन्द्र मिश्रा, पंडित रमेश चंद्र चतुर्वेदी, जितेंद्र सिंह वर्मा सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
संपादकीय
आज जब पूरी दुनिया समय को केवल घड़ी और तारीख में मापने लगी है, तब आगरा की कुटुंब संस्था का यह प्रयास हमें हमारी जड़ों की ओर लौटने का संदेश देता है। सनातन परंपरा में समय केवल संख्या नहीं है, बल्कि संस्कृति, प्रकृति और जीवन का संतुलन है। तिथि, पक्ष, मास और संवत—ये केवल पंचांग के शब्द नहीं, बल्कि भारतीय जीवन पद्धति की आत्मा हैं।
आधुनिकता की दौड़ में हम धीरे-धीरे अपनी परंपराओं से दूर होते गए। आज अधिकांश लोग ग्रेगेरियन कैलेंडर की तारीख तो जानते हैं, लेकिन चैत्र, वैशाख, श्रावण और कार्तिक का महत्व भूलते जा रहे हैं। ऐसे समय में चैत्र से प्रारंभ होने वाला यह सनातन कैलेंडर केवल एक प्रकाशन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण की शुरुआत है।
यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत की समय गणना प्रणाली हजारों वर्षों से वैज्ञानिक आधार पर खड़ी है। सूर्य और चंद्रमा की गति, ऋतुओं का चक्र, ग्रहण का समय—इन सबकी सटीक जानकारी हमारे ऋषियों ने बहुत पहले दे दी थी। इसलिए सनातन कैलेंडर केवल धार्मिक दस्तावेज नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है।
आज आवश्यकता है कि समाज के अन्य संगठन भी इस प्रकार के प्रयास करें, ताकि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम व्यापक स्तर पर हो सके। यदि हर घर में सनातन कैलेंडर पहुंचे और हर बच्चा यह जान सके कि उसका नववर्ष चैत्र से शुरू होता है, तो यह केवल परंपरा की रक्षा नहीं बल्कि भारतीय अस्मिता की पुनर्स्थापना होगी।
डॉ भानु प्रताप सिंह, संपादक
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