आगरा। केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए यूजीसी (UGC) बिल को लेकर देशव्यापी विरोध के बीच राजीव गांधी बार एसोसिएशन ने भी आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमाशंकर शर्मा ने केंद्र की मोदी सरकार पर देश को जाति के आधार पर विभाजित करने का गंभीर आरोप लगाया है।
‘जातीय जहर घोल रही सरकार’
वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने कहा कि भाजपा सरकार वोटों की राजनीति के लिए सवर्ण, पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यकों के बीच खाई पैदा कर रही है। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि मोदी सरकार वही ‘बांटों और राज करो’ की नीति अपना रही है जो कभी अंग्रेजों ने अपनाई थी। शर्मा ने चेतावनी दी कि शैक्षणिक संस्थानों में जातियों का जहर घोलना भविष्य के लिए अत्यंत खतरनाक साबित होगा।
भाजपा नेताओं से इस्तीफे की मांग
रमाशंकर शर्मा ने आगरा के भाजपा सांसदों, विधायकों और मंत्रियों पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर उनमें थोड़ी भी नैतिकता बची है, तो उन्हें इन जनविरोधी नीतियों के विरोध में इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता ने हर वर्ग और धर्म के ऊपर उठकर उन्हें जिताया था, लेकिन आज वे मौन रहकर इस विभाजनकारी नीति का हिस्सा बने हुए हैं।
शंकराचार्य के अपमान पर भी बरसे
यूजीसी बिल के साथ-साथ रमाशंकर शर्मा ने प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के अपमान की भी घोर निंदा की। उन्होंने कहा कि जो सरकार हिंदुत्व और सनातन की रक्षा का दावा करती है, वही आज संतों का अपमान कर रही है, जिसे देश की जनता कभी बर्दाश्त नहीं करेगी।
31 जनवरी के बाद बड़ा आंदोलन
राजीव गांधी बार एसोसिएशन ने अल्टीमेटम दिया है कि यदि यह बिल वापस नहीं लिया गया, तो 31 जनवरी के बाद एसोसिएशन एक व्यापक जन-आंदोलन शुरू करेगी।
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