Agra, Uttar Pradesh, India. 15 मई, 2021 को विश्व परिवार दिवस है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) कुटुम्ब प्रबोधन गतिविधि चला रहा है। इसके तहत 15 मई को प्रातः जागरण से लेकर रात्रि भोजन तक क्या-क्या करना है, अवगत करा दिया गया है। अपेक्षा की गई है कि प्रत्येक व्यक्ति पांच परिवारों तक यह गतिविध कराए। इससे संयुक्त परिवार की अवधारणा मजबूत होगी।
आरएसएस के बृज प्रांत के सह प्रांत प्रचार प्रमुख कीर्ति कुमार ने एक वर्चुअल मीटिंग में परिवार दिवस की अवधारना को रखा। उन्होंने कहा संय़ुक्त परिवरों की संख्या बहुत कम हो गई है। आज हाल यह है कि बच्चे पढ़ाई और स्वतंत्रता के नाते परिवार से अलग रहना शुरू कर देते हैं। इसके कारण कई चीजें छूट रही हैं। संयुक्त परिवार में संस्कार और संस्कृति से जुड़े रहते हैं। हिन्दी के बारह महीने कितने लोगों को याद होंगे? यह संस्कार और संस्कृति से जुड़ा पहला प्रश्न है। हम सारे त्योहार पंचांग के आधार पर मनाते हैं। जब हमें हिन्दी के महीने पता नही होंगे तो अपनी संस्कृति से कैसे जुड़ पाएंगे? केवल मकर संक्रांति ही अंग्रेजी तिथि के अनुसार है, जो 14 या 15 जनवरी की आता है।
कीर्ति कुमार ने कहा- आज की पीढ़ी के परिवार से दूर होने का परिणाम यह है कि हम संस्कार खो रहे हैं। बड़े शहरों में एकल परिवार होने के कारण माता-पिता नौकरी पर चले जाते हैं। बच्चे क्या कर रहे हैं, कुछ पता नहीं है। जब ऊंच-नीच होती तो संयुक्त परिवार की याद आती है। नैतिक संस्कार संयुक्त परिवार में आते हैं। कुंभकार की तरह परिवार को ढालना होता है। ‘हम दो हमारे दो’ की अवधारण के कारण माता-पिता अकेले रह जाते हैं। ऐसे में मता-पिता के सुख-दुख की चिन्ता कौन करे? बहुत से बच्चे माता-पिता को छोड़कर विदेश में रह रहे हैं। घटना होने पर आने में ही कई दिन लग जाते हैं। भौतिकता की चकांचौंध और मोबाइल के कारण भी हमारा युवा दिशाहीन हो रहा है। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए आरएसएस ने कुटुम्ब प्रबोधन गतिविधि शुरू की है। उद्देश्य यह है कि एकल परवारों को संस्कारित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम करते रहें। इसमें सफलता मिल रही है।

उन्होंने बताया- आज की वैश्विक महामारी में कुटुम्ब प्रबोधन की गतिविध की महत्ता बढ़ गई है। कोरोना काल में भी माता-पिता की कोई चिन्ता करने वाला नहीं है। संघ अपनी शक्ति के साथ सेवा कार्य कर रहा है। हम सब एक परिवार के अंग हैं। इसलिए एक दूसरे की चिन्ता करनी है। आज ऐसा समय आ गया है कि एकदूसरे की चिन्ता किए बगैर देश गौरवशाली नहीं बन सकता है। यह ठीक है कि इस समय परिवार के साथ हैं लेकिन इसका कारण कोरोना है। जब कोरोना का खत्म होगा तब भी क्या परिवार को समय देंगे? वर्ष में एक दिन तो परिवार के लिए निकालें।
कीर्ति कुमार ने कहा- 15 मई को विश्व परिवार दिवस के अवसर पर अपने परिवार के साथ बैठें। प्रातःकाल से रात्रि तक कार्यक्रम करने हैं। प्रातःकाल जागरण के बाद मंत्र बोलना है। माता-पिता का चरणवंदन करना है। व्यायाम, स्नान, तुलसी माता को जल अर्पण, गौसेवा, चींटी व पशुपक्षियों को दाना और जल देना है। अगर घर पर गाय नहीं आती है तो गौशाला जाना है। शाम को संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का उद्बोधन होगा। रात्रि में आठ बजे परिवार के साथ सामूहिक भोजन करेंगे। इससे पूर्व परिवार के सब लोग मिलकर भोजन बनाएं। भोजन मंत्र के साथ भोजन करना है।
पश्चिम महानगर के प्रचार प्रमुख विनीत शर्मा ने संचालन किया। डॉ. मुकेश कुमार और दिव्या त्यागी ने कोरोना महामारी में सकारात्मक विचार बनाने पर जोर दिया। डॉ. भानु प्रताप सिंह ने कहा कि जब हम परिवार से दूर होते हैं तो तब लगता है कि संसार में इससे बड़ा कोई दुख नहीं है। इस मौके पर सुशील शर्मा (आवाज नाउ), राम अवतार बघेल, दिनेश चाहर, चेतन चाहर, विशाल परिहार, रोहित भदौरिया, सुरेश कुमार, श्रीकांत पाराशर आदि मौजूद थे।
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