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Mathura, Uttar Pradesh, India, Bharat.
मथुरा। परखम मथुरा में चल रहे विशेष संघ शिक्षा वर्ग के दौरान प्रचार विभाग ने विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) के अवसर पर दीनदयाल गौ-विज्ञान अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र पर वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में प्रान्त सह प्रचार प्रमुख श्री मनमोहन, मथुरा विभाग प्रचार प्रमुख श्री कमल कौशिक, वृन्दावन जिला प्रचार प्रमुख श्री राम, तथा अशोक चौबे सहित कई स्वयंसेवक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का उद्देश्य
आयोजन का मुख्य लक्ष्य पर्यावरण संरक्षण के महत्व को रेखांकित करना और स्थानीय स्तर पर हरित आवरण बढ़ाने में योगदान देना था।
दीनदयाल गौ-विज्ञान अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र की भूमिका गायों के संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण बताई गई।
कार्यक्रम का प्रारंभ और हिस्सा लेने वाले
कार्यक्रम का शुभारम्भ संस्था के वरिष्ठ कार्मिकों द्वारा किया गया। प्रान्त सह प्रचार प्रमुख श्री मनमोहन ने उपस्थितों को संबोधित करते हुए पर्यावरण दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला और स्थानीय समुदाय को वृक्षारोपण व संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
मथुरा विभाग प्रचार प्रमुख श्री कमल कौशिक ने कहा कि जंगलों और पेड़ों का संरक्षण सिर्फ सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि समाज का नैतिक उत्तरदायित्व है। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण से न केवल वायु शुद्ध होती है बल्कि भू-स्थिरता और जैव विविधता भी बनी रहती है।
वृन्दावन जिला प्रचार प्रमुख श्री राम ने कार्यक्रम के आयोजकों और स्वयंसेवकों को बधाई दी तथा बताया कि केंद्र में लगाए जा रहे वृक्षों की देखभाल के लिए दीर्घकालिक योजनाएँ बनाई जाएंगी।
स्वयंसेवक अशोक चौबे advocate DGC Agra समेत अन्य सदस्य सक्रिय रूप से वृक्षारोपण में जुटे और उपस्थित बच्चों व स्थानीय नागरिकों को पौधे लगाने के सही तरीकों के बारे में जानकारी दी।
क्रियाकलाप और पौधारोपण
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न स्थानीय ए
वं मूल निवासी प्रजाति के पोधे लगाए गए, जिनमें छायादार और स्थानीय जलवायु के अनुरूप पेड़ शामिल थे ताकि उनकी जड़ें स्थानीय पारिस्थितिक तंत्र से अच्छी तरह जुड़ सकें।
पौधों के लगाने के साथ-साथ मिट्टी संरक्षण, जलसंचयन और निगरानी के उपायों पर कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें पौधों की सही दूरी, गोबर-खाद के उपयोग और नियमित पानी देने की आदतों पर चर्चा हुई।
आयोजकों ने परिसर में लगाए गए नए पौधों की निरंतर देखभाल के लिए स्वयंसेवकों की निगरानी टीम बनायी।
सामुदायिक जुड़ाव और भविष्य की योजनाएँ
कार्यक्रम में आसपास के गाँवों के लोग और शिक्षा वर्ग के छात्र-छात्राएँ भी शामिल हुए, जिससे स्थानीय लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ी। आयोजकों ने कहा कि भविष्य में ऐसे और अभियान नियमित अंतराल पर चलाए जाएंगे।
दीनदयाल गौ-विज्ञान अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र ने सार्वजनिक साझेदारी बढ़ाने की बात कही ताकि स्थानीय किसानों और हितधारकों को पेड़ों की देखभाल, जैविक खेती और गौ-आधारित पारिस्थितिक समाधानों पर प्रशिक्षित किया जा सके।
प्रभाव और संदेश
कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि छोटे-छोटे वृक्षारोपण प्रयास मिलकर बड़े पर्यावरणीय लाभ दे सकते हैं। उपस्थित नेताओं ने आग्रह किया कि हर नागरिक कम-से-कम एक पौधा लगाए और उसकी देखभाल सुनिश्चित करे।
आयोजकों ने अगले कुछ महीनों में लगाए गए पौधों की वृद्धि पर नजर रखने और उनकी स्थिति के अनुसार अतिरिक्त उपाय करने का आश्वासन भी दिया।।
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