Agra, Uttar Pradesh, India. गजेन्द्र शर्मा का नाम तो आपने सुना ही होगा। अरे वही सुप्रीम कोर्ट में लोन मोरेटोरियम पर याचिका दायर वाले गजेन्द्र शर्मा। देश के 60 करोड़ लोगों को सीधा आर्थिक लाभ दिलाने वाले गजेन्द्र शर्मा। इस कारण देश-विदेश में प्रसिद्ध गजेन्द्र शर्मा। प्राइम ऑप्टिकल वाले गजेन्द्र शर्मा। समाजसेवी और धर्मानुरागी गजेन्द्र शर्मा। उन्होंने एक और धमाका किया है। कोरोना काल में आपदा को अवसर बनाने वाले अस्पताल, पैथालॉजी लैब, डायग्नोस्टिक सेंटर, नर्सिंग होम्स को निशाने पर लिया है। आशा की जा रही है कि लोन मोरेटोरियम की तरह मरीजों के पैसे वापस हो सकते हैं। जिन अस्पतालों ने मरीजों को रसीद नहीं है, उनका भी इलाज खोजा जा रहा है।
निर्धारित दर से 50 गुना तक वसूली
गजेन्द्र शर्मा ने अपने पुत्र अधिवक्ता राहुल शर्मा के माध्यम से इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका प्रस्तुत की है, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। याचिका में कोरोना महामारी के दौरान ‘आपदा को अवसर’ बनाने वाले ‘धरती के भगवान’ निशाने पर लिए गए हैं। डॉक्टर ने कोरोना का इलाज करने के नाम पर निर्धारित दर से 50 गुना तक वसूली की। नकद पैसे लिए और रसीद तक नहीं दी। ऑक्सीजन और रेमडेसिविर इंजेक्शन के नाम पर लाखों की वसूली की गई। मरीजों को जबरन वेंटिलेटर पर रखा गया। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित शुल्क को हवा में उड़ा दिया गया। याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार के साथ ही राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और कोरोना उपचार से संबंधित अधिकारियों को प्रतिवादी बनाया गया है।
एक भगवान हत्यारा हो गया
गजेन्द्र शर्मा ने बताया- इस बार कोरोना में हमने अपने लोगों को खोया और उनके घर तक नहीं जा पाया। इतना खर्चा करने के बाद भी जिन्दा नहीं रहे। डॉक्टर्स ने लाखों रुपये वसूल किए। अंदर से दुखी था मैं। मेरी इच्छा हुई कि लड़ाई लड़ी जाए। कोर्ट बंद हैं और हमारी याचिका को स्वीकार कर लिया गया। डॉक्टर भगवान है और न्यायाधीश भी भगवान है। एक भगवान हत्यारा हो गया है। उम्मीद है कि दूसरे भगवान न्याय दिलाएंगे।
18 हजार में पीपीई किट, ऑक्सीजन, डॉक्टर की फीस भी
राहुल शर्मा एडवोकेट ने बताया- सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर प्रत्येक कोविड हॉस्पिटल में श्रेणीवार शुल्क तय किया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 अप्रैल, 2020 को आदेश जारी किया। इसमें साफतौर पर उल्लेख है कि एल-1 अस्पताल 10 हजार, एल-2 अस्पताल के 15 हजार और एल-3 अस्पताल के 18 हजार रुपये प्रतिदिन हैं। एल-3 के चार्ज में पीपीई किट, ऑक्सीजन, डॉक्टर, वेंटिलेटर की फीस शामिल है। हमने पाया कि ऑक्सीजन 24 घंटे लगाएं तो 12500 रुपये होते हैं लेकिन अस्पताल 5-7 हजार रुपये चार्ज कर रहे हैं। 40-80 हजार रुपये प्रतिदिन चार्ज किया है। इतना देने के बाद भी मरीज बचा नहीं है।
मनमाना शुल्क वापस दिलाने का प्रयास उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन ने यह नहीं देखा कि सरकार द्वारा निर्धारित दर ले रहे हैं या मनमाना। अगर अस्पताल वाले सही हैं तो पैसे वापस क्यों किए? पैसे वापस करने से क्या उनका अपराध समाप्त हो गया? हम चाहते हैं कि मनमाना लिया गया शुल्क वापस किया जाए। आपदा के समय सेवा की जाती है न कि वसूली की जाती है। हमने आगरा का उदाहरण दिया है। पूरे उत्तर प्रदेश के लिए याचिका है। हमने सुप्रीम कोर्ट तक जाने की तैयारी कर ली है। अस्पतालों का मैनेजमेंट मुख्य रूप से जिम्मेदार है। मथुरा का केडी मेडिकल कॉलेज की बहुत शिकायतें हैं। उसने एक भी मरीज को रसीद नहीं दी है।
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