दो से ज्यादा बार जीत चुके सांसद संगठन में भेजे जाएंगे, राज्यसभा में 80 प्रतिशत विशेषज्ञ को मौका
नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव 2024 की तैयारी में जुटी भाजपा एक साथ कई फॉर्मूलों पर काम कर रही है। पार्टी में मौजूदा सांसदों के टिकट काटने से लेकर नए चेहरों को मौका देने तक पर मंथन जारी है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी आजादी के 100वें साल तक संसद में युवा प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए काम कर रही है। चुनाव में भाजपा 150 नए प्रत्याशी उतार सकती है। इनमें 41 से 55 साल की उम्र के प्रत्याशियों की संख्या ज्यादा होगी।
भाजपा के एक महासचिव ने कहा कि पहली लोकसभा में 26 प्रतिशत सदस्यों की उम्र 40 से कम थी। बाद में संसद में युवा प्रतिनिधित्व कम होता गया। लोकसभा में तीन से 11 बार तक चुनाव जीतने वाले सांसदों की संख्या बढ़ती गई। इसे देखते हुए पार्टी दो या इससे अधिक बार लोकसभा चुनाव जीत चुके नेताओं में से ज्यादातर को संगठन की जिम्मेदारी देने जा रही है। इसके अलावा अपवाद को छोडक़र किसी को राज्यसभा दो बार से ज्यादा नहीं भेजा जाएगा। 80त्न ऐसे लोगों को मौका मिलेगा जो कानून, चिकित्सा, विज्ञान, कला, आर्थिक मामले, तकनीक, पर्यावरण और भाषा के जानकार हों। दस सीट पर चुनाव हुए तो 2 ही ऐसे प्रत्याशी होंगे जो जातीय समीकरण या संगठन में योगदान के लिहाज से महत्वपूर्ण होंगे।
युवा आबादी का प्रतिनिधित्व बढ़ाना चाहते हैं पीएम मोदी
देश में 65 प्रतिशत से ज्यादा युवा हैं, ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनका प्रतिनिधित्व बढ़ाना चाहते हैं। अगर एक शख्स को लगातार लोकसभा का टिकट मिलता है तो उसके साथी कार्यकर्ता चुनावी राजनीति से बाहर हो जाते हैं। इसलिए कुछ खास मौकों को छोडक़र किसी एक कार्यकर्ता को 2-3 बार से ज्यादा लोकसभा का प्रतिनिधित्व करने का मौका नहीं दिया जाए। इससे नए लोगों को मौका मिलेगा।
भाजपा के 68 सांसद तीन बार से ज्यादा जीते हैं
लोकसभा में भाजपा के 135 सदस्य पहली बार और 97 दूसरी बार चुनाव जीते हैं। दूसरी ओर, मेनका गांधी और संतोष गंगवार लगातार 8वीं बार और डॉ. वीरेंद्र कुमार 7वीं बार लोकसभा में हैं। इसके अलावा आठ सांसद छठी बार, 11 सांसद 5वीं बार, 19 सांसद चौथी बार और 28 सांसद तीसरी बार जीते हैं।
लोकसभा में औसत उम्र 54 साल, 25-40 वालों को दोबारा टिकट
मौजूदा लोकसभा में सांसदों की औसत आयु 54 साल है। भाजपा के 25 से 55 साल के सांसदों का प्रतिनिधित्व 53 प्रतिशत है। भाजपा 56 से 70 वर्ष के ज्यादातर सांसदों की जगह 41-55 आयु वर्ग वालों को लड़ाने की तैयारी कर रही है। 25-40 आयु वर्ग वालों को दोबारा से टिकट दिया जाएगा। ऐसे में 150 नए चेहरों को चुनाव में उतारना होगा।
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