राजा श्रेणिक के राज्य में एक चोर चंडाल जाति का था। वह अपने विद्याबल से रोज पेड़ को झुकाकर आम चोरी करता था। एक दिन पकड़ा गया। जब महामंत्री अभयकुमार को उसकी इस विलक्षण विद्या का पता चला उन्होंने उस चंडाल जाति के चोर को अपने से ऊंचे आसन पर बिठाकर पेड़ को झुकाने वाली विद्या सीखी।
न्यूटन जिन्होंने गुरुत्वाकर्षण का ज्ञान सहित दुनिया को कई अविष्कार दिए, जब उनकी प्रशंसा की जा रही थी उन्होंने सागर की ओर इशारा करते हुए कहा कि अभी तो मेरा ज्ञान इस सागर की इस बूंद के समान है। ज्ञान का सागर तो बहुत बड़ा है।
साध्वी पुष्पचुला केवली होते हुए भी आर्णिका पुत्र आचार्य के लिए गोचरी (भोजन) लाती रहीं। उनकी विनम्रता देखिए उन्होंने आर्णिका पुत्र आचार्य को पता ही नहीं चलने दिया कि वे केवली हैं। ये जैन धर्म की व्यवस्था है- केवलज्ञान प्राप्त होने पर भी अहंकार नहीं, केवलज्ञानी भी एक दूसरे को नमन करते हैं और हमें जरा सा कोई पद मिलने पर गर्व से सीना चौड़ा करक उसका बखान करते रहते हैं।
अरिहन्त परमात्मा जिन्होंने सर्वोच्च केवलज्ञान को प्राप्त कर लिया है फिर भी विनय गुण के कारण ‘नमो तिथस्य’ बोलकर तीर्थ को नमस्कार करते हैं। यानी साधु -साध्वी, श्रावक- श्राविका रूपी तीर्थ को नमस्कार करते हैं। केवल तन का झुक जाना ही विनय नहीं है। वास्तविक विनय तो मन का झुक जाना है। हम साधना कहीं भी जाकर करें परंतु वास्तविक साधना स्थल तो हमारा मन है, हमारा हृदय है। साधना बढ़ेगी तो सिद्धि बढ़ेगी, सिद्धि बढ़ेगी तो शुद्धि बढ़ेगी।
विनयानवत होने के ये चार उदाहरण वैराग्य निधि महाराज ने मंगलवार को श्री पृथ्वीचंद स्मृति भवन, जयपुर हाउस आगरा में ‘विनय गुण’ विषय पर प्रवचन करते हुए दिए। परम विदुषी जैन साध्वी वैराग्य निधि महाराज ने कहा कि सब गुणों में सर्वश्रेष्ठ गुण विनय गुण है। यह जिन शासन का मूल है। विनय धम्मो मूलो – विनय धर्म का मूल है। अरिहन्त परमात्मा भी जब समोशरण में विराजमान होते हैं चैत्य वृक्ष की प्रदिक्षणा देते हैं। प्रदिक्षणा देते समय ज्ञान दर्शन चरित्र गुणों को नमन किया जाता है। नमन का अर्थ है अपने मन को दूसरों को आगे झुका देना।
आम के फल से लदा पेड़ सदा झुका रहता है। आम सब पसंद करते हैं। ताड़ के पेड़ में जितने फल लगते हैं, उतना अकड़ कर रहता है। उसके फल को कोई पसंद नहीं करता। उसमें मादकता रहती है। अहंकार मद होता है, अहंकार पतन का कारण होता है। नंदी सूत्र में कहा गया है कि यदि आपके अंदर सद्गुण हैं वो अपने आप दिखते हैं, दूसरों को बताना नहीं पड़ता, जैसे दूध में मलाई अपने आप ऊपर आ जाती है।
परिवार हो या समाज अहंकारी व्यक्ति कभी सही निर्णय नहीं ले पाता। जिस समय उसको उबाल आ रहा हो उसके निर्णय गलत ही होंगे ? इसके विपरीत विनयवान व्यक्ति की क्षमता सोच समझकर सही निर्णय लेने की होती है। विनय भी चार प्रकार के बताये गए हैं- ज्ञान विनय, दर्शन विनय, चारित्र विनय और उपचार विनय। इसमें साधु साध्वियों को घर लाना, उपाश्रय लाना ले जाना छोड़ना उपचार विनय है। भावों में जितना सम्मान होगा भाग्य उतना ही खिलेगा।
जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक श्रीसंघ के अध्यक्ष राजकुमार जैन ने बताया कि 20 जुलाई को “जीवन की श्रेष्ठता किसमे?” विषय पर प्रवचन होंगे। आज का लाभार्थी परिवार कमल चंद्र, ध्रुव कुमार जैन था। सुशील जैन, योगेश बाबू जैन, वीरचंद गादिया, विनय चंद्र लोढ़ा, विमल जैन, दुष्यंत जैन, विपिन जैन, ध्रुव जैन, आदित्य जैन, मनीष वागचर, राजीव खरड़, संदेश जैन, गौरव, धीरज ललवानी, अंकित पाटनी की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
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