उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर प्रदेश की राजनीति में सरगर्मियां तेज होती दिख रही हैं। इसी कड़ी में राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े वरिष्ठ नेता और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विनय कटियार ने अयोध्या विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का दावा कर सियासी हलचल बढ़ा दी है।
मंगलवार को अयोध्या पहुंचे विनय कटियार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि राम जन्मभूमि उनकी कर्मभूमि है और वे 2027 के विधानसभा चुनाव में अयोध्या क्षेत्र से उम्मीदवार होंगे। उनके इस बयान को राजनीति में पुनः सक्रिय भूमिका निभाने की मंशा के तौर पर देखा जा रहा है।
संगठन और सामाजिक समीकरणों के बीच आया बयान
विनय कटियार कुर्मी समाज से आते हैं। उनका यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब कुर्मी समाज से जुड़े केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी हाल ही में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष निर्वाचित हुए हैं। ऐसे में कटियार का दावा सामाजिक और संगठनात्मक समीकरणों के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।
संसद से राज्यसभा तक रहा लंबा सफर
71 वर्षीय विनय कटियार तीन बार फैजाबाद (अब अयोध्या) संसदीय क्षेत्र से लोकसभा सांसद रह चुके हैं। वे 1991, 1996 और 1999 में संसद पहुंचे। इसके अलावा 2006 में रायबरेली लोकसभा उपचुनाव भी लड़ा, हालांकि उस चुनाव में उन्हें कांग्रेस नेता सोनिया गांधी से हार का सामना करना पड़ा।
कटियार दो बार राज्यसभा सांसद (2006–2012 और 2012–2018) भी रहे हैं और अपने तीखे बयानों के कारण अक्सर चर्चा में रहते हैं।
भाजपा के लिए संदेश और संभावित असर
कटियार के इस ऐलान को पार्टी के भीतर सक्रियता बढ़ाने और नेतृत्व पर दबाव की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। उनके दावे के बाद यह सवाल खड़ा हो गया है कि भारतीय जनता पार्टी इस बयान पर क्या रुख अपनाती है और अयोध्या सीट को लेकर उसकी रणनीति क्या होगी। फिलहाल, अयोध्या की सियासत में 2027 से पहले ही नई बहस छिड़ चुकी है।
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