तिरुपति बालाजी के दिव्य स्वरूप में सजे महागणपति: पंचम गणेश महोत्सव के दसवें दिन दक्षिण भारतीय श्रृंगार ने मोहा भक्तों का मन

RELIGION/ CULTURE





आगरा। छलेसर रोड स्थित श्री वरद वल्लभा महागणपति मंदिर में चल रहे 12 दिवसीय पंचम गणेश महोत्सव के दसवें दिवस भगवान श्री वरद वल्लभा महागणपति ने जामुनी रंग के वस्त्र-अलंकार में तिरुपति बालाजी स्वरूप में भक्तों को दिव्य दर्शन दिए। भगवान के मस्तक पर तिरुपति बालाजी शैली का विशेष तिलक लगाया गया, जिससे उनके मुख-मंडल की आभा और अधिक निखर उठी। दक्षिण भारतीय शैली के श्रृंगार में सुसज्जित महागणपति का स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण बना रहा।

भगवान की वस्त्र सेवा विजय वीर सिंह द्वारा की गई। जामुनी वस्त्रों, पारंपरिक दक्षिण भारतीय अलंकरण और तिरुपति बालाजी तिलक के संयोजन से भगवान का स्वरूप दक्षिण भारत की मंदिर परंपरा की झलक प्रस्तुत कर रहा था।

मंदिर के संस्थापक हरिमोहन गर्ग ने बताया कि मंदिर में फूल और फलों से विशेष फूल बंगला सजाया गया। इसकी खासियत यह रही कि फूल बंगले के श्रृंगार में दक्षिण भारत से विशेष रूप से मंगाई गई साड़ी का प्रयोग किया गया। साड़ी की पारंपरिक बुनावट और रंग-संयोजन को फूलों और फलों की सजावट के साथ इस तरह जोड़ा गया कि पूरा बंगला दक्षिण भारतीय मंदिरों की सज्जा की अनुभूति करा रहा था।

तिरुपति बालाजी स्वरूप का यह श्रृंगार भगवान गणपति के प्रति श्रद्धा के साथ देश की विविध मंदिर परंपराओं के सुंदर समागम को दर्शाता रहा।

दसवें दिवस वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महागणपति हवन नीरज खन्ना द्वारा किया गया। हवन में विधि-विधान से आहुतियां अर्पित कर भगवान गणपति की आराधना की गई। श्रद्धालुओं ने हवन में सहभागिता कर परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और मंगल की कामना की।

मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित लखन दीक्षित ने बताया कि भगवान के श्रृंगार में दक्षिण भारतीय पूजा परंपरा के अनुरूप तिलक, वस्त्र और अलंकरण को विशेष महत्व दिया गया।




Dr. Bhanu Pratap Singh