इंदौर: वैश्विक राजनीति में एक नया, बेहद विवादास्पद तथा इतिहास बनाने वाला अध्याय जुड़ गया है। 3 जनवरी 2026 की रात अमेरिका ने दक्षिण अमेरिकी देश वेनेज़ुएला की राजधानी कराकास पर बड़े पैमाने पर सैन्य हमला किया और मात्र आधे घंटे के भीतर वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो तथा उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को गिरफ़्तार कर लिया। इस ऑपरेशन ने दुनिया भर में तीखी, गहन तथा बहुआयामी बहस छेड़ दी है। एक तरफ इसे तानाशाही के खिलाफ न्याय की जीत, दमनकारी शासन के अंत तथा लोकतंत्र बहाली की दिशा में निर्णायक कदम बताया जा रहा है, तो दूसरी तरफ इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन, संप्रभुता पर हमला तथा साम्राज्यवादी हस्तक्षेप माना जा रहा है। प्रख्यात राजनीतिक रणनीतिकार डॉ. अतुल मलिकराम का कहना है कि “वेनेज़ुएला पर अमेरिका का हमला और मादुरो की गिरफ़्तारी एक जटिल, बहुआयामी, ऐतिहासिक तथा वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित करने वाली घटना है। यह कार्रवाई न केवल वेनेज़ुएला के भविष्य को प्रभावित करेगी, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन, अंतरराष्ट्रीय कानून की विश्वसनीयता, क्षेत्रीय स्थिरता, विकासशील देशों की संप्रभुता तथा बड़े देशों की एकतरफा कार्रवाइयों पर भी गहरा, दीर्घकालिक तथा अप्रत्याशित असर डालेगी। भारत जैसे देशों को इस घटना से सतर्कता बरतने, कूटनीतिक सबक लेने तथा अपनी रक्षा, सुरक्षा तथा विदेश नीति की रणनीति को और अधिक मजबूत करने की प्रेरणा लेनी चाहिए।”
घटना का पूरा ब्यौरा बेहद चौंकाने वाला तथा फिल्मी पटकथा जैसा है। 3 जनवरी 2026 की रात कराकास में कई जोरदार धमाकों ने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया। अमेरिकी लड़ाकू विमान तथा हेलीकॉप्टरों ने कराकास के सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए। ऑपरेशन इतना तेज तथा सुनियोजित था कि वेनेज़ुएला की रक्षा प्रणाली जवाब नहीं दे सकी। अमेरिकी विशेष बलों ने राष्ट्रपति भवन में घुसकर मादुरो तथा उनकी पत्नी को गिरफ़्तार किया। मादुरो दंपती को अमेरिका ले जाकर न्यूयॉर्क के मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में रखा गया है, जहां उन पर नारको-टेररिज्म, मादक पदार्थ तस्करी तथा हथियारों की तस्करी जैसे गंभीर आरोपों में मुकदमा चलेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस ऑपरेशन को “सफल कार्रवाई” बताया और दावा किया कि मादुरो ड्रग तस्करी तथा नारको-टेररिज्म में शामिल थे।
इस कार्रवाई की पृष्ठभूमि कई वर्षों की है। मादुरो पर 2020 से ही अमेरिकी अदालत में आरोप थे और उनकी गिरफ़्तारी के लिए इनाम घोषित था। ट्रंप ने इसे अमेरिकी सुरक्षा के लिए जरूरी बताया। लेकिन इस कार्रवाई ने वैश्विक स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं उकसाईं।
अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई नारको-टेररिज्म के खिलाफ थी। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि मादुरो तथा उनकी सरकार मादक पदार्थ तस्करी में शामिल थी। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका वेनेज़ुएला में स्थिरता के लिए भूमिका निभाएगा। इस दृष्टिकोण के समर्थकों का मानना है कि मादुरो का शासन दमनकारी था। वेनेज़ुएला में आर्थिक संकट, भुखमरी तथा मानवाधिकार उल्लंघनों की खबरें थीं। लाखों लोग देश छोड़कर भाग गए। समर्थकों का कहना है कि मादुरो की गिरफ़्तारी लोकतंत्र बहाली का कदम हो सकती है।
विरोधी पक्ष इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन मानता है। संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार, किसी संप्रभु देश पर हमला तभी वैध है जब वह आत्मरक्षा में हो या संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी हो। विरोधी कहते हैं कि यह हमला तेल संसाधनों पर कब्जे की साजिश थी। वेनेज़ुएला के पास दुनिया के बड़े तेल भंडार हैं। इतिहास में अमेरिका के हस्तक्षेप अस्थिरता लाए हैं।
भारत ने इस घटना पर गहरी चिंता जताई और संयम व संवाद की अपील की। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत संप्रभुता का सम्मान करता है।
यह कार्रवाई नैतिक रूप से जटिल है। मादुरो का शासन दमनकारी था, लेकिन अमेरिका का तरीका अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन लगता है। कानूनी मानदंड से देखें तो यह गलत प्रतीत होता है। लेकिन सुरक्षा के नजरिए से कुछ के लिए जरूरी था।
वेनेज़ुएला पर अमेरिका का हमला और मादुरो की गिरफ़्तारी एक ऐतिहासिक घटना है। यह वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित करेगी। डॉ. मलिकराम कहते हैं कि “यह घटना सतर्कता का संदेश है। भारत को अपनी रणनीति मजबूत करनी होगी।”
-डॉ. अतुल मलिकराम (राजनीतिक रणनीतिकार)
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