जैन साध्वी वैराग्य निधि के आगे बड़े-बड़े Motivational Speaker फेल हैं, पढ़िए मन का प्रबंधन कैसे करें
मनुष्य जन्म जितना प्रयासों से मिला है जितना परिश्रम से मिला है उसका मूल्यांकन किया नहीं जा सकता। मनुष्य एक संज्ञी पंचेन्द्रिय जीव है। संज्ञी यानी जिसका मन हो। सारा खेल मन का ही है। साधु जीवन में भी केवल वेश परिवर्तन सब कुछ नहीं है, मन का परिवर्तन भी जरूरी है। केश लुंचन के […]
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