शिया देश ईरान के आगे आखिरकार पाकिस्तान की सरकार को झुकना पड़ा है। पाकिस्तान की सरकार ने तमाम ना नुकूर के बाद अब ईरान से गैस के आयात के लिए पाइपलाइन के निर्माण पर काम करना शुरू कर दिया है।
पाकिस्तान और ईरान के बीच गैस पाइपलाइन को लेकर समझौता हुआ था। ईरान ने अपनी तरफ गैस पाइपलाइन का निर्माण पूरा कर दिया है और अब पाकिस्तान को अपना वादा पूरा करना है। इससे पहले ईरान ने धमकी दी थी कि अगर पाकिस्तान पाइपलाइन का काम शुरू नहीं करता है तो वह 18 अरब डॉलर का जुर्माना वसूल करेगा।
वहीं पाकिस्तान ने इस पाइपलाइन का निर्माण तो शुरू कर दिया है लेकिन अब उसे अमेरिका के कोप का सामना करना पड़ सकता है। इस परियोजना से चीन को बड़ा फायदा हो सकता है जो ग्वादर में अरबों डॉलर निवेश कर रहा है।
पाकिस्तान ने दो चरणों में लंबे समय से प्रतीक्षित गैस पाइपलाइन परियोजना को आगे बढ़ाने के अपने फैसले की घोषणा की है। शुरुआती चरण में ग्वादर से 81 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन का निर्माण शामिल होगा, जो गैस क्षेत्र से ईरान द्वारा बिछाई गई मौजूदा पाइपलाइन से जुड़ेगी।
पाकिस्तान के विशेष निवेश सुविधा परिषद ने इस योजना के लिए मंजूरी दे दी है, जो 781 किलोमीटर तक फैली एक बड़ी पाइपलाइन का हिस्सा है और अंततः नवाबशाह से जुड़ती है। पेट्रोलियम डिविजन जल्द ही पाकिस्तान के संघीय कैबिनेट से 81 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के लिए प्रशासनिक स्वीकृति लेगा। इसके लिए गैस इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट सेस के बोर्ड से वित्त मंत्रालय द्वारा धन की व्यवस्था की जाएगी।
चीन के दबाव में झुका पाकिस्तान?
इस 81 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन का उद्देश्य ईरान-पाकिस्तान गैस पाइप लाइन परियोजना के तहत ग्वादर को गैस उपलब्ध कराना है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ईरान ने पाकिस्तान को अपने समझौते का पालन करने की समय सीमा सितंबर 2024 तक बढ़ा दी है। इस समय सीमा को पूरा करने में विफल रहने पर ईरान पेरिस में अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता के माध्यम से 18 अरब डॉलर का जुर्माना लगा सकता है। हालांकि, ईरान ने पाकिस्तान को अपनी विशेषज्ञता भी प्रदान की है, मध्यस्थता से बचने के लिए समय सीमा से पहले समाधान खोजने के लिए एक संयुक्त प्रयास का प्रस्ताव दिया है।
ईरानी तकनीकी और कानूनी विशेषज्ञों की एक टीम को जनवरी में वार्ता के लिए पाकिस्तान का दौरा करने के लिए निर्धारित किया गया था, लेकिन दोनों देशों के बीच तनाव ने उनके आगमन को रोक दिया। अब, सामान्य स्थिति बहाल होने के साथ ही दोनों के बीच बातचीत हो सकती है। दोनों देशों की की समन्वय समितियां परियोजना को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए एक व्यवहार्य रणनीति विकसित करने के लिए मिलकर काम करेंगी।
विशेषज्ञों के मुताबिक इस पाइपलाइन को बनाने में आने वाला खर्च खुद पाकिस्तान को वहन करना होगा। वहीं पाकिस्तान को इस डील के लिए मजबूर करने में चीन का भी बड़ा हाथ हो सकता है जिसने हाल के वर्षों में ईरान के साथ अपनी दोस्ती को मजबूत कर लिया है। पाकिस्तान ने यह कदम ऐसे समय पर उठाया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चल रहा है और तेहरान के खिलाफ कई प्रतिबंध लगाए गए हैं। इससे अमेरिका पाकिस्तान पर भड़क सकता है। अब तक इसी डर से पाकिस्तान पीछे हट रहा था।
-एजेंसी
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