नई दिल्ली। गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) के नियमों में बदलाव होने जा रहा है। जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) ट्रांजेक्शन को लेकर नियमों में बदलाव किया है। नया नियम 1 मई, 2023 से लागू होगा और कारोबारियों के लिए इसका पालन करना जरूरी होगा।
जीएसटीएन ने कहा है कि 1 मई से किसी भी ट्रांजेक्शन की रसीद इनवॉयस रजिस्ट्रेशन पोर्टल (आईआरपी) पर 7 दिनों के भीतर अपलोड करना जरूरी होगा। जीएसटी कंप्लायंस का समय पर पालन कराने के लिए नियमों में बदलाव किया गया है। जीएसटीएन के अनुसार 100 करोड़ से ज्यादा टर्नओवर वाले सभी कारोबारियों के लिए 1 मई से इस नियम का पालन करना जरूरी होगा।
नए नियम के तहत 100 करोड़ से ज्यादा टर्नओवर वाले कारोबार 7 दिन से ज्यादा पुरानी इनवॉयस को अपलोड नहीं कर पाएंगे। यानी कि 7 दिन से ज्यादा पुराने ट्रांजेक्शन की रसीद जीएसटीएन पर अपलोड नहीं हो पाएगी और इस पर रिटर्न भी क्लेम नहीं किया जा सकेगा। हालांकि, यह नियम सिर्फ इनवॉयस को लेकर है। कारोबारी डेबिट और क्रेडिट नोट्स को 7 दिन बाद भी अपलोड कर सकेंगे।
जीएसटी नियम कहता है कि अगर कोई इनवॉयस आईआरपी पर अपलोड नहीं होता है तो उस पर कारोबारी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का फायदा नहीं उठा पाएंगे। आईआरटीसी किसी उत्पाद के कच्चे माल और फाइनल प्रोडक्ट के बीच के अंतर को वापस पाने के लिए क्लेम किया जाता है। मौजदा समय में कंपनियां कभी भी अपना ई-इनवॉयस अपलोड कर सकती हैं, लेकिन नया नियम लागू होने के बाद उनके पास सिर्फ 7 दिन का समय होगा।
विशषज्ञ का कहना है कि नया नियम जीएसटी कलेक्शन बढ़ाने में मददगार होगा। साथ ही कंपनियों को समय पर आईटीसी का लाभ भी मिल जाएगा। इसका मकसद डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया को और मजबूत बनाना है। सरकार ने हाल में ही 100 करोड़ से ज्यादा टर्नओवर वाले कारोबार या कंपनियों के लिए भी हर ट्रांजेक्शन का जीएसटी इनवॉयस निकालना अनिवार्य कर दिया था।
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