“यहां बच्चा-बच्चा राम है” — विराट हिंदू सम्मेलन में गरजे महंत योगेश पुरी
सनातन चेतना का उद्घोष
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Agra, Uttar Pradesh, India, Bharat.
आगरा। मनकामेश्वर मंदिर के पीठाधीश्वर महंत योगेश पुरी ने कहा कि
यह वसुधैव कुटुंबकम् का देश है, यहां बच्चा-बच्चा राम है।
वह रविवार को लोहामंडी स्थित मालवीय कुंज पार्क में
सनातन उत्थान समिति द्वारा आयोजित
विराट हिंदू सम्मेलन में सैकड़ों की संख्या में उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि
हिंदू कभी बंटा नहीं, एक था, एक है और एक रहेगा।
हिंदू एक था, एक है और एक रहेगा
महंत योगेश पुरी ने कहा कि
इस देश की भूमि चंदन है,
हर गांव तपोभूमि है और
हर बालिका देवी की मूरत है—यही सनातन की आत्मा है।
उन्होंने कहा कि
यहां बच्चा-बच्चा राम है।
आज भी हम चंद्रमा को चंदा मामा कहते हैं, क्योंकि यह हमारी चेतना और संस्कृति का हिस्सा है,
जो सीधे हमारे पुराणों और सनातन परंपराओं से जुड़ी हुई है।

संस्कार ही सबसे बड़ा शस्त्र
महंत योगेश पुरी ने कहा कि
माता लक्ष्मी और पिता विष्णु जैसे आदर्शों ने हमारे हिंदू कुटुंब की रचना की है।
उन्होंने कहा कि
आज आवश्यकता है कि हम अपने बच्चों को ऐसे संस्कार दें, जिससे वे सनातन धर्म की रक्षा के लिए सदैव तैयार रहें।
उन्होंने पूर्वजों का उदाहरण देते हुए कहा कि
पहले परिवार का एक बच्चा धर्म की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया जाता था।
आज यदि हम ऐसा नहीं कर सकते, तो कम से कम
धर्म की शिक्षा अवश्य दे सकते हैं।
संस्कार ही सनातन की ढाल हैं।

नारी शक्ति: सनातन की असली ताकत
इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के
भवेंद्र जी ने कहा कि
इस सम्मेलन में माताओं-बहनों की सबसे अधिक उपस्थिति हमारी सबसे बड़ी शक्ति है।
उन्होंने कहा कि
माताएं ही धर्म का पहला पाठ पढ़ाती हैं,
जिसे समाज आगे बढ़ाता है।
उन्होंने कहा कि नारी शक्ति ही राष्ट्र को मजबूती के साथ आगे बढ़ाने की प्रेरणा देती है।
बबीता पाठक ने महिलाओं का उत्साहवर्धन करते हुए
सनातन धर्म की मूल अवधारणाओं पर प्रकाश डाला।
भव्य कलश यात्रा और सांस्कृतिक वैभव
सम्मेलन से पूर्व सिर की मंडी स्थित गोरख बागीची से
सैकड़ों महिलाओं की भव्य कलश यात्रा बैंड-बाजों के साथ निकाली गई।
यह यात्रा बलदेवगंज बाजार, लोहामंडी चौराहा, आलमगंज रोड से होती हुई
मालवीय कुंज पार्क पहुंचकर संपन्न हुई।
पीले वस्त्रों में सजी महिलाएं सिर पर कलश रखकर
रामधुन पर भजन गाती हुई चल रही थीं।
पूरे मार्ग में
पुष्पवर्षा से स्वागत किया गया।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं और
गो-पूजन भी संपन्न हुआ।

मंच पर रविंद्र जैन, अमित बंसल और कृष्ण मुरारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन शिवम कुमार ने किया।
व्यवस्थाओं में सुनील जैन, अनुज बंसल, राजेश कुमार,
पार्षद शरद चौहान और जीतूं जी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

संपादकीय | आज हिंदू सम्मेलन क्यों ज़रूरी हैं?
आज का भारत तेज़ गति से आगे बढ़ रहा है, लेकिन
संस्कार और सांस्कृतिक चेतना को बनाए रखना उससे भी अधिक आवश्यक है।
विराट हिंदू सम्मेलन केवल आयोजन नहीं,
सामूहिक आत्मबोध के मंच हैं।
यहां परंपरा और भविष्य का मिलन होता है।
आज जब सांस्कृतिक भ्रम, वैचारिक विखंडन और पहचान की राजनीति समाज को प्रभावित कर रही है,
तब ऐसे सम्मेलन
एकता, आत्मविश्वास और स्पष्ट दिशा प्रदान करते हैं।
नारी शक्ति, युवा चेतना और बाल संस्कार—ये तीनों स्तंभ तभी मजबूत होंगे जब समाज संगठित होगा।
हिंदू सम्मेलन
किसी के विरुद्ध नहीं,
बल्कि अपनी जड़ों को पहचानने का माध्यम हैं।
“यहां बच्चा-बच्चा राम है” केवल नारा नहीं,
जीवन-मूल्य और राष्ट्रबोध है।
ऐसे सम्मेलन निरंतर होते रहना ही
सनातन संस्कृति और भारत की आत्मा को सुरक्षित रख सकता है।
डॉ भानु प्रताप सिंह, संपादक
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