
आगरा: मोदी सरकार के केंद्रीय राज्य मंत्री ने अंगदान और देहदान के प्रति लोगों को जागरूक बनाने के साथ-साथ अंगदान और देहदान करने के प्रति जागरूक बनाने का बीड़ा उठाया तो वह अब एक अभियान बन गया है जो अब सार्थक भी नजर आ रहा है। मोदी सरकार के इस मंत्री ने पहले खुद अंगदान किया। उसके बाद इस मंत्री के परिवार के लोग भी आगे आए और फिर काफिला जुड़ता चला गया।
मोदी सरकार के इस मंत्री का नाम प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल है जो मोदी सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री हैं और परिवार व स्वास्थ्य मंत्रालय इनके पास है। जैसे ही इन्हें यह मंत्रालय मिला उन्होंने चिकित्सा सुविधाओं को दुरुस्त करना शुरू कर दिया लेकिन जब उन्हें पता चला कि भारत में अंगदान और देहदान करने वालों की संख्या कम है और ऐसा न होने से कई मरीजों की जिंदगी भी नहीं बच पाती तो इस मंत्री ने अंगदान किया और इसके प्रति लोगों को जागरूक करने का बीड़ा उठाया।
7 अंगों का किया अंगदान
मंत्री प्रो एसपी सिंह बघेल ने बताया कि वे इस बात में यकीन रखते है कि किसी भी व्यक्ति से कुछ करने के लिए कहने से पहले हमें उस कार्य को खुद में आत्मसात करना चाहिए। इसलिए सर्व प्रथम मैंने लोगों से अंगदान की अपील करने से पहले स्वयं अंग दान करने की शपथ ली और शरीर के 7 अंगों को दान किया। उन्होंने बताया कि मनुष्य के कई सारे अंगों का दान किया जा सकता है। यह सिर्फ हृदय, लिवर और गुर्दे का दान नहीं होता। पैनक्रियाज, फेंफड़े, छोटी और बड़ी आंत, त्वचा, हड्डी, हार्ट वाल्व और टेंडन जैसे टीश्यूज को भी दान कर सकते हैं। दान किया हुआ यह अंग किसी दूसरे व्यक्ति के शरीर में प्रत्यारोपित किया जाता है। इसके लिए दानदाता के शरीर से दान किए गए अंग को ऑपरेशन द्वारा निकाला जाता है।
उन्होंने कहा कि इस अभियान से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने के लिए उन्होंने अंगदान और देहदान अभियान की शुरुआत की। इस अभियान को 16 सितंबर को आत्मसात किया जाएगा। जीआईसी ग्राउंड पर वृद्ध स्तर पर कैंप आयोजित होगा जहां लोग अंग और दे दान कर सकते हैं। एक व्यक्ति मरणोपरांत आठ लोगों को जीवन दे सकता है। अंगदान से बड़ा कोई दान नहीं हो सकता।
उन्होँने कहा कि हम सब जानते हैं कि शरीर मरणोपरांत कुछ देर में ही ख़ाक में मिल जाना है। अगर वह शरीर का कोई अंग किसी के काम आ जाए या किसी का जीवन उसके किसी अंग से बच जाए तो इससे बड़ी बात क्या हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि अंगदान का जो प्रमाण पत्र मिलेगा, उसे फ्रेम कराकर अपनी बैठक में लगा लें। समय समय पर अपने परिवार को ये बताते रहे हैं कि मेरे मरने के बाद शरीर दान दे दें। इससे मेरी आत्मा को अवश्य शांति मिलेगी।
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