आगरा में मासूम के कातिल का ‘द एंड’: 8 साल की बच्ची की हत्या करने वाला दरिंदा सुनील एनकाउंटर में ढेर

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आगरा: ताजनगरी को झकझोर देने वाले 8 वर्षीय मासूम बच्ची हत्याकांड के मुख्य आरोपी सुनील को आगरा पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया है। शनिवार तड़के करीब 3 बजे बमरौली कटारा इलाके में हुई इस मुठभेड़ में 25 हजार के इनामी बदमाश सुनील ने खुद को घिरता देख पुलिस पर फायरिंग कर दी थी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली लगने से वह घायल हुआ और अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

250 CCTV और 12 टीमें: खाकी का ‘मेगा हंट’ ऑपरेशन

24 मार्च को ताजगंज से लापता हुई बच्ची का शव अगले दिन जब आरोपी सुनील के किराए के कमरे से मिला, तो पूरे शहर में उबाल आ गया था। आगरा पुलिस ने इसे ‘हाई-प्रायोरिटी’ केस मानते हुए एक चक्रव्यूह रचा आरोपी को दबोचने के लिए पुलिस की 12 विशेष टीमें और 70 पुलिसकर्मी दिन-रात एक किए हुए थे।

पुलिस ने शहर के 250 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और 22 संदिग्धों से कड़ी पूछताछ की। डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास द्वारा 25 हजार का इनाम घोषित होने के कुछ ही घंटों बाद पुलिस ने मुखबिर तंत्र की मदद से सुनील को बमरौली कटारा में ट्रैक कर लिया।

मुठभेड़ की रात: जब आरोपी ने पुलिस पर झोंका फायर

देर रात जब पुलिस की संयुक्त टीमों ने बमरौली कटारा में घेराबंदी की, तो बाइक सवार सुनील ने सरेंडर करने के बजाय तमंचा निकाल लिया। उसने पुलिस टीम पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें एक उपनिरीक्षक (SI) घायल हो गए। आत्मरक्षार्थ पुलिस ने भी मोर्चा संभाला और जवाबी फायरिंग की। पुलिस की गोली सुनील को लगी, जिसके बाद उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

मौके से बरामदगी

​पुलिस ने एनकाउंटर स्थल से आरोपी की बाइक, एक 315 बोर का तमंचा, कई जिंदा कारतूस और खोखा बरामद किया है। इस कार्रवाई के साथ ही उस दरिंदे का अंत हो गया जिसने एक मासूम की बर्बरता से जान ली थी।

​पुलिस का सख्त संदेश: अपराधियों के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’

​इस निर्णायक कार्रवाई ने अपराधियों के बीच कड़ा संदेश भेजा है। मासूम बच्ची की हत्या के बाद उपजे भारी जन-आक्रोश के बीच आगरा पुलिस का यह ‘क्विक एक्शन’ विभाग के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। पुलिस ने न केवल आरोपी को खोजा, बल्कि एक ‘सिस्टमेटिक हंट’ के जरिए उसे कानून के दायरे में लाने की कोशिश की, जिसमें नाकाम रहने पर उसे अपनी जान गंवानी पड़ी।

Dr. Bhanu Pratap Singh