आगरा: ताजनगरी के बहुचर्चित मासूम हत्याकांड के मुख्य आरोपी सुनील के एनकाउंटर के बाद मामला अब एक नए विवाद में उलझ गया है। जहाँ एक तरफ पुलिस इस मुठभेड़ को अपनी बड़ी कामयाबी बता रही है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय नागरिकों ने एनकाउंटर की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को ताजगंज क्षेत्र के नीतिबाग स्थित गोबर चौकी पर दर्जनों लोग जमा हो गए और जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों की मांग: “हमें पहचान सुनिश्चित करनी है”
नीतिबाग और आसपास के इलाकों से आए प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुलिस जिसे मुठभेड़ में ढेर करना बता रही है, उसका चेहरा सार्वजनिक किया जाए। प्रदर्शन कर रहे लोगों का तर्क है कि जिस दरिंदे ने 8 साल की मासूम के साथ बर्बरता की, वे अपनी आंखों से तस्दीक करना चाहते हैं कि मारा गया शख्स वास्तव में वही सुनील है या कोई और।
पुलिस विरोधी नारेबाजी और एनकाउंटर पर सवाल
गोबर चौकी पर जमा भीड़ ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने एनकाउंटर की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। स्थानीय नागरिकों का कहना है “पूरे इलाके को झकझोर देने वाली इस वारदात के असली कातिल का अंत हम अपनी आंखों से देखना चाहते हैं। जब तक पुलिस शव या चेहरा नहीं दिखाती, तब तक संदेह बना रहेगा।”
मौके पर भारी पुलिस बल तैनात, स्थिति तनावपूर्ण
अचानक हुए इस हंगामे के बाद ताजगंज क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। एहतियात के तौर पर अतिरिक्त पुलिस बल को तैनात किया गया है ताकि स्थिति बेकाबू न हो। पुलिस अधिकारी प्रदर्शनकारियों को समझाने और शांत कराने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन लोग अपनी मांग पर अड़े हुए हैं।
क्या है पुलिस का रुख?
फिलहाल पुलिस की ओर से चेहरा दिखाने की मांग पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है। कानूनी प्रक्रिया के अनुसार, पोस्टमार्टम और शिनाख्त की अपनी एक नियमावली होती है, जिसे लेकर पुलिस पशोपेश में है। हालांकि, क्षेत्र में तनाव को देखते हुए आला अधिकारी पल-पल की निगरानी कर रहे हैं।
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