हर साल 20 फरवरी को विश्व न्याय दिवस या विश्व सामाजिक न्याय दिवस मनाया जाता है। विश्व सामाजिक न्याय दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य सामाजिक असमानता व अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना और गरीबी, लिंग और शारीरिक भेदभाव, अशिक्षा, धार्मिक भेदभाव को खत्म करने के लिए विभिन्न समुदायों को एक साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लाना है, ताकि सामाजिक रूप से समाज में समानता लायी जा सके। दार्शनिक फ्रेडरिक डगलस ने सामाजिक न्याय की परिभाषा भी कुछ इस प्रकार दी “ जहां न्याय से वंचित किया जाता है, जहां गरीबी लागू की जाती है, जहां अज्ञानता व्याप्त है, और जहां किसी एक वर्ग को यह महसूस कराया जाता है कि समाज उन पर अत्याचार करने, लूटने और उन्हें नीचा दिखाने की एक संगठित साजिश है, वहां न तो व्यक्ति और न ही संपत्ति सुरक्षित रहेगी।” मार्टिन लूथर किंग जूनियर का कथन सदैव याद रखें- कहीं भी अन्याय हर जगह न्याय के लिए खतरा है।
सामाजिक न्याय के इस दिन कई स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय विशेष गतिविधियों में वाद विवाद भाषण क़ानून व एन॰जी॰ओ॰ द्वारा गरीबी, सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार या बेरोजगारी से संबंधित विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करते हैं, ताकि समाज व छात्रों को पता चले कि सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को बनाए रखना आवश्यक है। यह सामाजिक अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने और लिंग, जाति, असमानता, धार्मिक भेदभाव आदि के बारे में बाधाओं को दूर करने का दिन है। यह दुनिया भर में किए गए सामाजिक अन्याय और समाधानों और सुधारों पर गौर करने के लिए भी है।
हम इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं कर सकते कि सामाजिक अन्याय या असमानता से देश में और देशों के बीच एक में शांतिपूर्ण और समृद्ध का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत ब्रिज है। मूल रूप से उन बाधाओं को दूर करने के लिए सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को बनाए रखना आवश्यक है। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO ) के अनुमानों के अनुसार, वर्तमान में, यह भी देखा गया है कि 40% से कम लोगों के पास बेहतर गुणवत्ता वाले रोजगार और बेहतर संसाधन की पहुंच है| अपनी आय बढ़ाने के लिए और समाजों में योगदान करने के लिए नौकरियों के अवसर कम है |
सामाजिक न्याय का विश्व दिवस एक वैश्विक अवलोकन है और सार्वजनिक अवकाश नहीं है। 1995 में, कोपेनहेगन, डेनमार्क में सामाजिक विकास के लिए विश्व शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया था और इसके परिणामस्वरूप कोपेनहेगन घोषणा और कार्यक्रम की कार्रवाई हुई। शिखर सम्मेलन में 100 से अधिक राजनीतिक नेताओं ने गरीबी और पूर्ण रोजगार से लड़ने का संकल्प लिया, साथ ही वे स्थिर, सुरक्षित समाजों व विकास योजनाओं के लिए काम करेंगे।
10 वर्षों के बाद, संयुक्त राष्ट्र, अमेरिकन लाइब्रेरी एसोसिएशन (ALA) व अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO ) की भावना को संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों ने फरवरी 2005 में न्यूयॉर्क में सामाजिक विकास के लिए कोपेनहेगन कार्यक्रम की कार्रवाई की घोषणा की। सामाजिक विकास को कैसे आगे बढ़ाया जाए यह भी चर्चा का प्रमुख बिंदु था। 26 नवंबर, 2007 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 20 फरवरी को सामाजिक न्याय के वार्षिक विश्व दिवस के रूप में घोषित किया। 2009 में, यह दिन पहली बार मनाया गया था। विश्व शिखर सम्मेलन के अनुसार, राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने के लिए सरकार को सभी के लिए एक सामान अधिकार व साधन उपलब्ध करने के लिए एक ढांचा तैयार करना आवश्यक है।
भारतीय संविधान सामाजिक न्याय की आधारशिला पर खड़ा है। हमारे संविधान निर्माताओं ने आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक और लैंगिक आदि रूपों से पिछड़े तबकों को बराबरी पर लाने के लिए कई अहम प्रावधान किए हैं। बीते सात दशक में हमने इस दिशा में काफी प्रगति भी की है, लेकिन कई मोर्चों पर अभी कोई ख़ास सफलता नहीं मिली है। भारतीय संविधान “अनुच्छेद 14 “सभी नागरिकों को कानून की नजरों में बराबर मानते हुए समान कानूनी संरक्षण देने की व्यवस्था करता है “अनुच्छेद 15 “धर्म, नस्ल, जाति, लिंग, जन्मस्थान के आधार पर किसी भी तरह के भेदभाव को निषिद्ध करता है|
“अनुच्छेद 17” में छुआछूत का अंत करते हुए इसका किसी भी रूप में आचरण दंडनीय अपराध करार दिया गया है। अनुच्छेद 39 (क) व 39( घ) में महिलाओं को पुरुषों के समान जीविका के अवसर और वेतन देने की व्यवस्था। अनुच्छेद 42 में महिलाओं के लिए कामकाज के उचित वातावरण/शर्तों की व्यवस्था करने और मातृत्व राहत देने का प्रावधान। अनुच्छेद 243 (घ) के तहत देश की सभी पंचायती राज संस्थाओं में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित। सती प्रथा :1988 में लागू सती प्रथा (निवारण) अधिनियम, मैला ढोने की प्रथा : शुष्क शौचालय निर्माण (निषेध) कानून, कन्या भ्रूण हत्या : लिंग चयन प्रतिषेध अधिनियम-1994, दहेज प्रथा : दहेज प्रतिषेध अधिनियम-1961, बाल विवाह : बाल विवाह (निषध) अधिनियम-2007 के तहत 18 वर्ष के कम उम्र की लड़कियों, 21 साल से कम के लड़कों की शादी कराना दंडनीय अपराध है। ये कानून सामाजिक न्याय के लिए हैं।
इस वर्ष 2021 की विश्व सामाजिक न्याय दिवस थीम डिजिटल अर्थव्यवस्था में सामाजिक न्याय के लिए एक आह्वान है। डिजिटल अर्थव्यवस्था काम की दुनिया को बदल रही है। 2020 की शुरुआत से, COVID-19 महामारी के परिणामों ने दूरस्थ कार्य व्यवस्था को जन्म दिया है और कई व्यावसायिक गतिविधियों की निरंतरता के लिए अनुमति दी है, जो डिजिटल अर्थव्यवस्था के विकास और प्रभाव को और मजबूत कर रही है। सूचना की उपलब्धता और उपयोग और इंटरनेट की सीमित तक पहुंच, मौजूदा असमानताओं को गहरा कर रहा है जबकि डिजिटल लेबर प्लेटफ़ॉर्म मज़दूरों को आय-सृजन के अवसर और लचीली कार्य व्यवस्था से लाभ प्रदान करते हैं, जिनमें महिलाओं के लिए, विकलांग व्यक्ति, युवा और प्रवासी मज़दूर शामिल हैं, वे कुछ चुनौतियाँ भी पेश करते हैं।
-राजीव गुप्ता जनस्नेही
लोक स्वर, आगरा
- Why Vulkan Vegas Casino Became My Preferred Gambling Destination UK Player Story - October 2, 2026
- Spela i Din Egen Rytm och Ta Hem Vinster med Tillit på Smash Casino för Sverige - September 29, 2026
- Jackpot Casino – Registrierungsanleitung für neue Spieler in Deutschland - September 29, 2026