आगरा। मुग़ल शासक औरंगजेब के अत्याचारों के विरुद्ध बिगुल फूंकने वाले महान किसान नायक और सनातन धर्म रक्षक वीर गोकुला जाट की स्मृति को आगरा में अब स्थायी सम्मान मिलने जा रहा है। जिस ऐतिहासिक स्थल पर उन्होंने धर्म और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया था, उसी आगरा कोतवाली परिसर के समीप उनकी भव्य प्रतिमा और शिलालेख स्थापित किया जाएगा।
सांसद और महापौर ने किया स्थलीय निरीक्षण
इस ऐतिहासिक पहल को अमलीजामा पहनाने के लिए फतेहपुर सीकरी के सांसद राजकुमार चाहर, आगरा की महापौर हेमलता दिवाकर और नगरायुक्त अंकित खंडेलवाल ने कोतवाली क्षेत्र का विस्तृत निरीक्षण किया। टीम ने उस स्थान को चिन्हित कर लिया है, जहाँ ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार वीर गोकुला जाट को बंदी बनाकर अमानवीय यातनाएं दी गई थीं।
किसान स्वाभिमान और धर्म रक्षा के प्रतीक थे गोकुला
सांसद राजकुमार चाहर ने कहा कि वीर गोकुला जाट केवल एक योद्धा नहीं, बल्कि किसानों के स्वाभिमान और सनातन धर्म के रक्षक थे। उन्होंने औरंगजेब द्वारा मंदिरों के ध्वंस और किसानों पर बढ़ते करों के विरोध में 20 हजार किसानों की सेना खड़ी कर मुग़ल सत्ता की नींव हिला दी थी। युद्ध के बाद उन्हें गिरफ्तार कर आगरा लाया गया, जहाँ धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया गया। लेकिन उन्होंने झुकने के बजाय बलिदान को चुना। उनके साथ उनके चाचा उदय सिंह ने भी प्राणों की आहुति दी थी।
आगामी पीढ़ियों के लिए बनेगा प्रेरणा स्रोत
महापौर हेमलता दिवाकर ने बताया कि आगरा नगर निगम जल्द ही प्रतिमा स्थापना की प्रक्रिया शुरू करेगा। यह स्मारक आने वाली पीढ़ियों को साहस, संघर्ष और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देगा। अधिकारियों के अनुसार, यह स्थल न केवल ऐतिहासिक स्मृति को संजोएगा, बल्कि किसान संघर्ष और अत्याचार के विरुद्ध प्रतिरोध का एक सशक्त प्रतीक बनेगा।
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