आगरा (रुनकता)। ऐतिहासिक धरोहरों के लिए दुनिया भर में मशहूर आगरा इन दिनों जैव विविधता के एक अद्भुत केंद्र के रूप में उभर रहा है। रुनकता स्थित सूर सरोवर (कीठम झील) में मध्य एशिया और तिब्बत से आए दुर्लभ प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट गूँज रही है। विशेष रूप से ‘बार-हेडेड गूज’ (Bar-headed Goose) की मौजूदगी ने पक्षी प्रेमियों और वैज्ञानिकों के बीच भारी उत्साह पैदा कर दिया है।
हिमालय के शिखर से सूर सरोवर तक का सफर
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, बार-हेडेड गूज दुनिया के सबसे ऊँचाई पर उड़ान भरने वाले पक्षियों में से एक हैं। ये पक्षी लगभग 29,000 फीट की ऊँचाई पर हिमालय पर्वतमाला को पार करते हुए तिब्बत, मंगोलिया और मध्य एशिया के बर्फीले इलाकों से यहाँ पहुँचते हैं। अपने मूल निवास स्थान पर अत्यधिक ठंड और झीलों के जम जाने के कारण ये पक्षी भोजन और सुरक्षित ठिकाने की तलाश में आगरा की आर्द्रभूमि (Wetland) का रुख करते हैं।
कीठम झील ही क्यों है इनकी पसंद?
विशेषज्ञों का कहना है कि सूर सरोवर इन पक्षियों के लिए एक ‘आदर्श विश्राम स्थल’ है। इसकी मुख्य वजहें हैं अनुकूल वातावरण, झील की उथली जलराशि और शांत परिवेश व भोजन की उपलब्धता यहाँ मौजूद जलीय वनस्पतियां इन पक्षियों का मुख्य आहार हैं। साथ ही पारिस्थितिकी संतुलन प्रवासी पक्षियों की भारी संख्या यह दर्शाती है कि कीठम झील का पानी अभी भी प्रदूषण से मुक्त और स्वास्थ्यप्रद है।
आगरा में ‘नेचर टूरिज्म’ को मिलेगा बढ़ावा
आगरा अभी तक केवल ताजमहल और किलों के लिए जाना जाता था, लेकिन अब बर्ड वॉचिंग और नेचर फोटोग्राफी यहाँ के पर्यटन का नया चेहरा बन रहे हैं। अक्टूबर से मार्च के बीच यहाँ आने वाले हजारों प्रवासी पक्षी स्थानीय पर्यटन को नई दिशा दे सकते हैं। पर्यावरणविदों का मानना है कि यदि इस आर्द्रभूमि का सही संरक्षण किया गया, तो भविष्य में यहाँ और भी दुर्लभ प्रजातियां देखी जा सकेंगी।
प्रशासन की अपील: “कचरा न फैलाएं, शांति बनाए रखें”
वन्यजीव विशेषज्ञों और प्रशासन ने पर्यटकों से अपील की है कि झील क्षेत्र में प्लास्टिक न फेंकें और पक्षियों के पास जाकर उन्हें डराने की कोशिश न करें। प्रकृति के संरक्षण में जन-भागीदारी ही इन विदेशी मेहमानों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।
साभार सहित और गुरु डॉट कॉम
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