​‘टोंटी’ पर सियासी घमासान: सीएम योगी के तंज पर अखिलेश यादव का पलटवार, बोले- ‘यह हार की हताशा है’

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​लखनऊ: विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर लखनऊ में शुरू हुए ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा की गई एक टिप्पणी ने उत्तर प्रदेश की राजनीति का पारा एकाएक बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री के ‘टोंटी चोरी’ वाले तंज को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सीधे अपने ऊपर लेते हुए तीखा पलटवार किया है।

​क्या था सीएम योगी का तंज?

वृक्षारोपण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘हर घर नल’ योजना का जिक्र करते हुए व्यवस्था को नुकसान पहुँचाने वालों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “हम हर घर नल योजना को आगे बढ़ा रहे हैं, लेकिन पता लगता है कि कोई टोंटी चोरी कर ले जा रहा है, तो कोई इसे नुकसान पहुँचा रहा है। अगर कोई ऐसा करे, तो उसे टोकना चाहिए।” भले ही मुख्यमंत्री ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर सीधा हमला माना गया, क्योंकि अतीत में ‘टोंटी चोरी’ का विवाद सपा से जोड़कर देखा जाता रहा है।

​अखिलेश यादव का तीखा पलटवार

सीएम योगी के इस बयान के बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बेहद आक्रामक तेवर अपनाए। उन्होंने लिखा, “लत से गलत की ओर… वनस्पति विवेक छीन लेती है और निर्दोष लोगों की हत्याओं का खौफ रातों की नींद। नहीं तो पूरे होश में इतने ऊंचे पद पर बैठकर इतना निकृष्ट बयान कोई नहीं देता है।”

सपा प्रमुख ने आगे कहा, “कुछ लोग अपनी असफलता के लिए दूसरों को दोषी ठहराते हैं। यह हार की हताशा बोल रही है, क्योंकि कुदरत का बुलडोजर अब घूम गया है।” अखिलेश के इस बयान को सीधे तौर पर सीएम योगी की कार्यशैली और सत्ता विरोधी लहर से जोड़कर देखा जा रहा है।

​पर्यावरण के बहाने सियासी वर्चस्व की जंग

जहाँ एक ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पर्यावरण संतुलन, मौसम चक्र और खाद्यान्न संकट जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा करते हुए प्रकृति के प्रति कृतज्ञता जताने का संदेश दिया, वहीं दूसरी ओर इस कार्यक्रम की गूंज पूरी तरह से सियासी हो गई है। मुख्यमंत्री ने चेताया था कि यदि हमने पर्यावरण का ध्यान नहीं रखा, तो खाद्यान्न संकट खड़ा हो सकता है, लेकिन विपक्ष ने उनके भाषण के उस अंश को पकड़ा जो सीधे तौर पर राजनीतिक चुटकी जैसा था।

​फिलहाल, ‘टोंटी’ के इस नए विवाद ने प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर पुराने सियासी घावों को कुरेद दिया है, जिससे यह स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में यह वाकयुद्ध और अधिक तीखा होने वाला है।

Dr. Bhanu Pratap Singh