आगरा में भव्यता के साथ संपन्न हुआ नौ दिवसीय श्रीराम कथा महोत्सव: लंका दहन, राम-रावण युद्ध और राजतिलक के प्रसंगों ने किया श्रद्धालुओं को भावविभोर

RELIGION/ CULTURE

आगरा। श्री महाकालेश्वर मंदिर, बूढ़ी का नगला, दयालबाग में चल रहे नौ दिवसीय श्री रुद्र महायज्ञ, महारुद्राभिषेक एवं श्रीराम कथा महोत्सव का सोमवार को भव्य एवं भावपूर्ण समापन हुआ। अंतिम दिवस लंका दहन, राम-रावण युद्ध, भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी एवं राजतिलक के दिव्य प्रसंगों का कथा व्यास चित्रकूट धाम से पधारे पंडित विमलेश त्रिवेदी महाराज ने भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम के जयघोष के साथ भक्ति में डूबकर व्यास पीठ की आरती की।

प्रातःकाल मंदिर परिसर में भगवान महाकाल का विधि-विधान से पूजन, महारुद्राभिषेक एवं श्री रुद्र महायज्ञ संपन्न हुआ। नौ दिनों तक चले इस आयोजन में शिव आराधना और श्रीराम कथा का अद्भुत संगम देखने को मिला।

संध्या में कथा के अंतिम दिवस लंका दहन का प्रसंग सुनाते हुए पंडित विमलेश त्रिवेदी महाराज ने कहा कि जब माता सीता की खोज में हनुमान जी लंका पहुंचे, तब उन्होंने अपनी बुद्धि, शक्ति और प्रभु श्रीराम के प्रति अटूट समर्पण का परिचय दिया। रावण के दरबार में निर्भीक होकर प्रभु श्रीराम का संदेश देने के बाद हनुमान जी ने अपनी पूंछ में लगी अग्नि से पूरी लंका को जला दिया। उन्होंने कहा कि लंका दहन केवल नगर का दहन नहीं, बल्कि अहंकार, अत्याचार और अधर्म के विनाश का प्रतीक है।

इसके बाद राम-रावण युद्ध का वर्णन करते हुए कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्रीराम का युद्ध किसी व्यक्तिगत वैर के लिए नहीं, बल्कि धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश के लिए था। रावण अत्यंत विद्वान होने के बावजूद अहंकार और अधर्म के कारण अपने विनाश का कारण बना। भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर यह संदेश दिया कि संसार में कितना भी शक्तिशाली व्यक्ति क्यों न हो, यदि वह सत्य और धर्म के मार्ग से हट जाता है तो उसका पतन निश्चित है।

अयोध्या वापसी के प्रसंग ने कथा पांडाल को भावविभोर कर दिया। चौदह वर्ष का वनवास पूर्ण करने के बाद भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के अयोध्या लौटने पर पूरी अयोध्या दीपों से जगमगा उठी। अयोध्यावासियों ने अपने आराध्य का भव्य स्वागत किया। इसके बाद भगवान श्रीराम के राजतिलक का प्रसंग सुनाया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने स्वयं को अयोध्या के उत्सव का सहभागी महसूस किया। कथा पांडाल में जय श्रीराम के जयघोष गूंजते रहे और वातावरण भक्तिमय हो उठा।

कथा के समापन अवसर पर श्री महाकालेश्वर दरबार के आचार्य सुनील शास्त्री ने कहा कि नौ दिनों तक चले इस आध्यात्मिक आयोजन में भगवान शिव की आराधना के साथ श्रीराम के चरित्र के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को जीवन के आदर्शों का संदेश मिला। उन्होंने कहा कि श्रीराम का जीवन सत्य, मर्यादा, त्याग, कर्तव्य और धर्म का मार्ग दिखाता है, जबकि भगवान शिव की आराधना मनुष्य को आत्मिक शांति और शक्ति प्रदान करती है। उन्होंने आयोजन में सहयोग देने वाले सभी श्रद्धालुओं एवं भक्तों का आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर सुनील शास्त्री, रामचरण शर्मा, बूट्टी तिवारी, सरिता तिवारी, सुभाष गिरी, बाल कृष्ण अग्रवाल, अमित अग्रवाल, सचिन अग्रवाल, गिरीश पालवार, गौतम पालवार, कपिल पालवार, शोभित अग्रवाल आदि ने व्यास पीठ की आरती की।

Dr. Bhanu Pratap Singh