नई दिल्ली/लखनऊ। मशहूर अभिनेता मनोज बाजपेयी और निर्देशक नीरज पांडे की आगामी फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ अपनी रिलीज से पहले ही गंभीर विवादों में घिर गई है। फिल्म के महज 50 सेकंड के टीज़र ने न केवल ब्राह्मण समाज को आंदोलित कर दिया है, बल्कि इस पर अब राजनीतिक रार भी शुरू हो गई है।
मायावती ने बताया ‘जातिसूचक’ प्रहार
बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए फिल्म को तुरंत प्रतिबंधित करने की मांग की है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि फिल्मों में ‘पंडित’ शब्द का अपमानजनक इस्तेमाल समूचे ब्राह्मण समाज का अनादर है। उन्होंने लिखा, “यह बड़े दुख और चिंता की बात है कि अब फिल्मों में भी इस तरह का अपमान किया जा रहा है, जिससे समाज में जबरदस्त रोष है।”
निर्देशक नीरज पांडे की सफाई
विवाद बढ़ता देख निर्देशक नीरज पांडे ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि फिल्म का नाम किसी समुदाय को ठेस पहुँचाने के लिए नहीं रखा गया है। उन्होंने कहा फ़िल्म पूरी तरह काल्पनिक किरदार पर है ‘पंडित’ शब्द का प्रयोग केवल एक काल्पनिक पुलिस अधिकारी के बोलचाल के नाम के रूप में किया गया है। फ़िल्म में कोई जातिगत टिप्पणी नहीं है कहानी एक व्यक्ति के कर्मों पर आधारित है, न कि किसी जाति या धर्म पर। उन्होंने कहा भावनाओं का सम्मान करते हुए फिलहाल फिल्म के सभी टीज़र और प्रचार सामग्री को डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया है।
नीरज पांडे ने दर्शकों से अपील की है कि फिल्म को उसके पूरे संदर्भ में देखा जाना चाहिए और महज कुछ हिस्सों के आधार पर कोई राय नहीं बनानी चाहिए।
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