जैसे सब्जी का राजा आलू है, वैसे ही फलों का राजा आम है। आम इतना लोकप्रिय फल है कि एक कहावत ही बन गई- आम के आम और गुठलियों के दाम। आम देखकर ही खाने का मन हो जाता है। दशहरी आम का मौसम तो निकल गया। इस समय लंगड़ा और चौंसा आम का मौसम है। आगरा में यह आम 50-60 रुपये प्रति किलोग्राम मिल रहा है।
अगर आम के इतिहास पर दृष्टिपात करें तो भारत में 5000 साल पहले से आम की खेती की जाती है। इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि आम हम भारतीयों के लिए कितना महत्वपूर्ण है।1987 में भारत की राजधानी दिल्ली में आम के प्रचार-प्रसार के लिए एक वार्षिक दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय आम महोत्सव आयोजित किया गया। भारत में हर वर्ष 22 जुलाई को राष्ट्रीय आम दिवस मनाया जाता है।
लखनऊ परिक्षेत्र का दशहरी आम एक समय में इतना प्रसिद्ध था कि यह विदेशों तक निर्यात होता हैं। आम की किस्मों के बारे में पता करें तो अनेक तरह के आम आते हैं। आम की कुछ प्रजातियों का वजन चार से पांच किलो तक होता है। केरल में कन्नूर जिले के कन्नपुरम को ‘स्वदेशी मैंगो हेरिटेज एरिया’ घोषित किया गया है। कन्नपुरम आम की विभिन्न देशी किस्मों का घर है। यहां आम की 200 से अधिक किस्में उगाई जाती हैं। केरल के कन्नूर जिले में आम प्रेमी मई के प्रथम सप्ताह में आम की दावत करते हैं।
दुनिया में आम की कई नस्ले हैं, लेकिन दुनिया का सबसे महंगा आम जापान के मियाजाकी प्रांत का तइयो नो तमांगो आम है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस आम की कीमत 3 लाख रुपए किलो के करीब है। अब यह अपने भारत देश में बिहार के पूर्णिया में एक शख्स की मेहनत से तैयार किया गया है। भारत में 25 से 26 हजार रुपए का एक आम पड़ता है|
भारत में उगायी जाने वाली आम की किस्मों में दशहरी, लंगड़ा, चौसा, फज़ली, बम्बई ग्रीन, बम्बई, अलफ़ॉन्ज़ो, बैंगन पल्ली, हिम सागर, केशर, किशन भोग, मलगोवा, नीलम, सुर्वन रेखा, वनराज, जरदालू हैं। नई किस्मों में, मल्लिका, आम्रपाली, रत्ना, अर्का अरुण, अर्मा पुनीत, अर्का अनमोल तथा दशहरी-अनेक प्रमुख प्रजातियाँ हैं।
गर्मी के दिनों में हर शहर में जगह जगह आम से लदी ठेल मिल जाएँगी। आम में मिठास के साथ अनेक गुण भी होते हैं। इसके सेवन के इतने तरीके ईजाद हो गए हैं कि आदमी को खाने से कभी भी ऊब नहीं होती है। आम खाने के लोकप्रिय तरीके हैं- मैंगो शेक, स्मूदी, मैंगो केक, मैंगो आइसक्रीम, मैंगो रोटी, फ्रूट चाट और चूसना। ये तरीके भारत में नहीं, विदेशों में भी काफी प्रचलन में है।

-राजीव गुप्ता ‘जनस्नेही’
लोकस्वर, आगरा
98370 97850
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