आगरा। स्वच्छ पर्यावरण को स्वस्थ नागरिक जीवन की बुनियाद मानते हुए शहर में हरित प्रयासों को नई गति देने का संकल्प लिया गया। इसी क्रम में हॉर्टीकल्चर क्लब ने अपने 13वें वार्षिकोत्सव पर नगर निगम के सहयोग से पर्यावरण संरक्षण को लेकर ठोस पहल का ऐलान किया। कॉसमॉस मॉल स्थित फेयरफील्ड बाय मेरिएट में आयोजित इस कार्यक्रम में पर्यावरणीय चुनौतियों, नागरिक सहभागिता और सतत विकास पर गंभीर विचार-विमर्श हुआ।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ हरित संकल्प की शुरुआत
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि महापौर हेमलता दिवाकर एवं विशिष्ट अतिथि डॉ. सुषमा गुप्ता ने श्रीगणपति की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर किया। स्वागत उद्बोधन में हॉर्टीकल्चर क्लब की संस्थापिका लवली कथूरिया ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए पौधरोपण, जन-जागरूकता अभियानों और पर्यावरणीय गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी।
नगर निगम और सामाजिक संगठनों की साझा रणनीति
महापौर हेमलता दिवाकर ने कहा कि नगर निगम बस्तियों में समूह बनाकर स्वच्छता और पर्यावरण जागरूकता अभियान चला रहा है। शहर की सड़कों से कचरा घर हटाए जा चुके हैं और एत्मादपुर में कचरे से बिजली उत्पादन का संयंत्र तैयार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पौधरोपण के बाद उनकी देखरेख की जिम्मेदारी स्थानीय नागरिकों को सौंपी जा रही है, जिससे हरित प्रयास दीर्घकालिक बनें। महापौर ने हॉर्टीकल्चर क्लब से ठोस सुझाव आमंत्रित किए और भरोसा दिलाया कि नगर निगम मिलकर उन्हें लागू करेगा। बच्चों की सहभागिता पर भी विशेष जोर दिया गया।
मंच से उठी पर्यावरणीय चेतावनी की आवाज
कार्यक्रम में आशु मित्तल की प्रभावशाली प्रस्तुति ने पर्यावरणीय संकट की ओर ध्यान खींचा। रश्मि मित्तल की रचना “मुझे चलना था, पर सड़क मेरी नहीं थी…”, बीना सचदेवा की “पेड़ों की व्यथा” और “अब सांस लेना भी याद बन गया है” जैसी भावनात्मक प्रस्तुतियों ने सभागार को गंभीर चिंतन में डुबो दिया।
हरित विषयों पर खेल और प्रतिभाओं का सम्मान
वार्षिकोत्सव के दौरान पर्यावरण आधारित रोचक खेल आयोजित किए गए, जिनमें प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। हाल ही में संपन्न चार दिवसीय बोगनविलिया प्रदर्शनी सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन रचना अग्रवाल ने किया।
डेजी गुजराल, रेनू भगत, रविंद्र श्रीवास्तव सहित अनेक गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया कि यदि प्रशासन और समाज मिलकर कार्य करें, तो आगरा को हरित, स्वच्छ और सुंदर शहर बनने से कोई नहीं रोक सकता।
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