भारत में ही नहीं विदेशों में अपनी वास्तुशैली और शैक्षिक गुणवत्ता के लिए आगरा के सेंट जॉन्स कॉलेज ने परचम फैला रखा है। सेंट जॉन्स कॉलेज कल भी अपनी शैक्षिक गुणवत्ता के लिए प्रथम वरीयता में इसका स्थान था और आज भी 170 साल बाद प्रथम स्थान पर है। 16 दिसंबर 2020 सेंट जॉन्स कॉलेज का स्थापना दिवस है।
कॉलेज की वास्तु शिल्प से हम सब लोग बहुत प्यार करते हैं| इसी वास्तु शैली के कारण सैलानियों को बेबी रेड फोर्ट कह के न केवल दिखाया जाता रहा है बल्कि रिक्शे वालों की आय का साधन बनता है। शिक्षण कार्य के साथ इसकी वास्तु शैली का भी अपना ही एक अंदाज है। कॉलेज के पास अपने चार हॉस्टल हैं, जिसमें एक महिलाओं के लिए और तीन पुरुषों के लिए हैं। आज सेंट जॉन्स कॉलेज में शिक्षण के कई नए प्रयोग व नए पाठ्यक्रम शुरू किए हैं| इसी कारण पिछले डेढ़ दशक में कॉलेज के स्वरूप में परिवर्तन करना लाजमी है, जिसकी वजह से इस वक्त केवल एक डेविस छात्रावास महिलाओं के लिए संचालित होता है। कॉलेज में आर्ट्स और कॉमर्स व ऑफिस एक विंग में हैं| खेल का मैदान और साइंस फैकेल्टी यह एक विंग में स्थापित हैं।
पर्यावरण के दृष्टिकोण से कॉलेज अपने आप में एक महत्व रखता है। कॉलेज के मेन कैंपस में जब फुटबॉल, वॉलीबॉल और बास्केटबॉल के मैच या सामाजिक कार्य होता है तो उस उत्सव का आनंद लेने के लिए सड़क से लोगों की भीड़ जुट जाती है| यह अपने आप में एक अद्भुत नजारा होता है| फोटोग्राफरों के लिए कॉलेज की बिल्डिंग राष्ट्रीय उत्सव पर जब सजाई जाती है तो अखबारों के लिए वह तस्वीर का भाग बन जाती है| देश-विदेश में सभी का मन मोह लेती है कॉलेज की बिल्डिंग।
170 साल के इतिहास में कॉलेज ने अनेकों ऐसी विभूतियों को जन्म दिया है जिन्होंने कॉलेज के साथ आगरे का नाम भी देश विदेश में रोशन किया है। कॉलेज के छात्र हर उच्चपद पर पदस्थ होकर अपनी कार्यशैली व योग्यता से हमेशा सेंट जॉन्स कॉलेज का नाम बढ़ाया है। देश के सर्वोच्च पद राष्ट्रपति पद पर सेंट जॉन्स कॉलेज के पूर्व छात्र स्व. डॉ शंकर दयाल शर्मा जी से सुशोभित हुए| आज अगर हम यहां पर ऐसी विभूतियों के नाम लिखने लगेंगे तो शायद पूरा ही पेज भर जाएगा ।कॉलेज के छात्र एलाइड सर्विसेज, राजनीति, मीडिया, विदेश सेवाएँ, डॉक्टर, वकील, सीए, वैज्ञानिक, डिफ़ेन्स, व्यापार जगत आदि क्षेत्रों में सक्रिय हैं। इनके विद्यार्थियों ने अपने अपने क्षेत्रों में उच्च श्रेणी के मुकाम स्थापित किया है और देश की आय में वृद्धि करायी है।
इसकी एक विशेषता और है। ज्यादातर इसके पूर्व छात्रों की अगली जनरेशन भी इसी प्रतिष्ठित कॉलेज का हिस्सा बनी जो अपने आप में एक बहुत अनोखी बात है| वर्तमान में भी कॉलेज के छात्र हैं। मेरे परिवार का हर सदस्य इस प्रतिष्ठित कॉलेज का हिस्सा बना है।
कॉलेज की नींव आगरा का चर्च मिशनरी, जो 1840 में अस्तित्व में आई थी, उसके प्रयासों से चर्च मिशनरी सोसायटी ऑफ इंग्लैंड द्वारा अट्ठारह सौ पचास में स्थापित की गई थी। कॉलेज के पहले प्रिंसिपल स्व. थॉमस वाल्सी फ्रेंच, यूनिवर्सिटी कॉलेज, ऑक्सफोर्ड के एक प्रतिष्ठित फेलो व दार्शनिक व्यक्ति थे| आपने कॉलेज का अपना पाठ्यक्रम शुरू करते हुए कॉलेज द्वारा खुद ही परीक्षाओं का आयोजन कराया । कॉलेज 1862 से 1888 तक कोलकाता विश्वविद्यालय से अनुबंधित रहा। 1927 तक इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अनुबंधित रहा। 1927 में आगरा विश्वविद्यालय के गठन के साथ सेंट जॉन्स कॉलेज आगरा विश्वविद्यालय से अनुबंधित हुआ। आगरा विश्वविद्यालय के गठन के साथ, कॉलेज डॉ ए.डब्ल्यू के तत्कालीन प्रिंसिपल कुलपति बन गये। कॉलेज 1891 में बीए की कक्षाओं और एलएलबी कक्षाएं और संबद्धता मिल गई। 1893 में स्नातकोत्तर कक्षाओं के लिए इस प्रकार स्नातकोत्तर शिक्षण संस्थान के रूप में इतने कम समय में अपने आप को स्थापित किया। वर्ष 1958 में भारत के भारत रत्न पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी ने शताब्दी विंग का पत्थर लगाया जिसे 1959 में भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री नेहरू जवाहरलाल नेहरु द्वारा उद्घाटन किया| उस वक्त प्रधानमंत्री ने कहा मैं शिक्षण संस्थान को नहीं एक शिक्षा के मंदिर में आया हूँ। मेरे लिए बहुत सौभाग्य की बात है,|
170 साल में करीब दो दर्जन प्रिंसिपल्स के माध्यम से कॉलेज संचालित होता आया है| वर्तमान में 25वें प्रिंसिपल के रूप में डॉ एसपी सिंह के नेतृत्व में कॉलेज तीव्र गति से अपनी प्रतिष्ठा में चार चाँद लगा रहा है। आप बहुत जल्दी पूर्व छात्र संगठन को नया आकर देंगे। आज 16 दिसंबर को स्थापना दिवस के उपलक्ष में मैं अपने प्रतिष्ठित कॉलेज सेंट जॉन्स कॉलेज के सभी सम्मानित शिक्षणगण व उनके सहयोगियों को हृदय से सभी पूर्व छात्रों की तरफ से आभार प्रकट करता हूं और ईश्वर से कामना करता हूं कि इसी तरीके से कॉलेज दिनों-दिन इसी तरीके से नए-नए आयाम स्थापित करें और अपने छात्रों के माध्यम से जन सामान्य का कल्याण करे|

राजीव गुप्ता, पूर्व छात्र
सेंट जॉन्स कॉलेज, आगरा
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