लखनऊ यूनिवर्सिटी में अगले सत्र से हिंदू अध्ययन केंद्र शुरू होगा। इसके माध्यम से यूजी और पीजी दोनों कोर्स में सनातन वैदिक संस्कृति विषय अनिवार्य रूप से पढ़ाया जाएगा। इसके अलावा एमए इन हिंदू अध्ययन कोर्स भी शुरू होगा। इसके साथ ही हिंदू अध्ययन शोध पीठ भी स्थापित होगी। मंथन हॉल में आचार्य अभिषेक ब्रम्हाचारी महाराज की मौजूदगी में यह जानकारी वीसी प्रो. आलोक कुमार राय ने दी।
वीसी ने बताया कि वाराणसी के आचार्य अभिषेक ने ही विवि में हिंदू अध्ययन केंद्र शुरू करने का प्रस्ताव दिया था। आचार्य ने कहा कि युवाओं को वैदिक संस्कृति से जोड़ने के लिए ऐसे केंद्र की काफी जरूरत महसूस की जा रही थी। केंद्र के माध्यम से हिंदू रीति-रिवाज, सनातन परंपरा और वेदों को सरल भाषा में पढ़ने और समझाने का प्रयास किया जाएगा। वीसी ने बताया कि संस्कृत विभाग एवं प्राच्य संस्कृत विभाग के शिक्षकों की मदद से पढ़ाया जाएगा।
आगामी सत्र से संस्कृत एवं प्राच्य संस्कृत विभाग के स्टूडेंट्स को सनातन वैदिक संस्कृति विषय अनिवार्य रूप से लेना होगा। इस प्रस्ताव को जल्द ही बोर्ड ऑफ स्टडीज, फैकल्टी बोर्ड, विद्या परिषद और कार्य परिषद से पास करवाया जाएगा।
वीसी ने बताया कि यूजीसी ने हिंदू स्टडीज में नेट की परीक्षा भी शुरू कर दी है। लिहाजा यूजी और पीजी में सनातन वैदिक संस्कृति विषय लेने वाले स्टूडेंट्स को काफी फायदा होगा। इसके साथ ही हिंदू शोध पीठ की स्थापना के लिए जल्द ही राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
इस दौरान युवा चेतना के राष्ट्रीय संयोजक रोहित कुमार सिंह ने कहा की देश का स्वर्णिम समय है हम सबको मिलकर भारतीय संस्कृति और सभ्यता के संवर्द्धन हेतु अपना योगदान देना है। इस मौके पर प्राच्य संस्कृत विभाग के शिक्षक डॉ. श्यामलेश कुमार तिवारी, डॉ. भुवनेश्वरी भारद्वाज, प्रॉक्टर प्रो. राकेश द्विवेदी और प्रवक्ता प्रो. दुर्गेश श्रीवास्तव मौजूद रहे।
-एजेंसी
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