बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी का सोमवार शाम को दिल्ली के एम्स में निधन हो गया। वह 72 साल के थे और कैंसर से पीड़ित थे। 3 महीने पहले गले में दर्द की शिकायत पर जांच कराई तो कैंसर का पता चला था। इसके बाद दिल्ली एम्स में उनका इलाज चल रहा था।
सुशील मोदी कैंसर की जानकारी खुद 3 अप्रैल को सोशल मीडिया पर दी थी। उन्होंने लिखा था- पिछले 6 महीने से कैंसर से संघर्ष कर रहा हूं। अब लगा कि लोगों को बताने का समय आ गया है। लोकसभा चुनाव में कुछ कर नहीं पाऊंगा। प्रधानमंत्री को सब कुछ बता दिया है। देश, बिहार और पार्टी का सदा आभार और सदैव समर्पित।
बिहार भाजपा के इतिहास में सुशील कुमार मोदी चारों सदन का सदस्य बनने वाले इकलौते नेता बन गए थे । सुशील मोदी बिहार में 70 के दशक के जेपी आंदोलन से राजनीति में आए थे। इसके बाद RSS से जुड़े रहे। उनकी छात्र राजनीति की शुरुआत 1971 में हुई थी। 1990 में सुशील ने पटना केन्द्रीय विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और विधानसभा पहुंचे।साल 2004 में वे भागलपुर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव जीते। साल 2005 में उन्होंने संसद सदस्यता से इस्तीफा दिया और विधान परिषद के लिए निर्वाचित होकर उपमुख्यमंत्री बने। यहीं से नीतीश कुमार के साथ उनका साथ शुरू हुआ।
सुशील मोदी 2005 से 2013 और 2017 से 2020 तक बिहार के वित्त मंत्री रह चुके हैं। 2020 में जब फिर से एनडीए की सरकार बनी तो सीएम नीतीश कुमार चाहते थे कि सुशील मोदी ही डिप्टी सीएम बनें। लेकिन, शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें राज्यसभा भेज दिया। कहा यह भी जा रहा है कि इस बार जो नीतीश कुमार एनडीए में फिर से शामिल हुए, उसके पीछे सुशील मोदी की अहम भूमिका थी
-एजेंसी
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