गविष्ठि यात्रा में उमड़ा जनसैलाब, कानपुर देहात और औरैया में जगद्गुरु शंकराचार्य का भव्य स्वागत, ‘गौ माता राष्ट्र माता’ के मुद्दे पर लिया सामूहिक संकल्प

REGIONAL

कानपुर देहात/औरैया। ऐतिहासिक 81 दिवसीय ‘गविष्ठि (गौ-रक्षार्थ धर्मयुद्ध)’ यात्रा के तहत परमाराध्य परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ‘1008’ का मंगलवार को कानपुर देहात और औरैया जनपद की विभिन्न विधानसभाओं में भव्य स्वागत किया गया। यात्रा के दौरान अकबरपुर रनिया, रसूलाबाद, झींझक-डेरापुर, सिकंदरा और औरैया विधानसभा क्षेत्रों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे। हर स्थान पर उपस्थित लोगों ने वैदिक मंत्र “अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ” का सामूहिक उच्चारण करते हुए गौ-रक्षा का संकल्प लिया।

यात्रा के दौरान जगद्गुरु शंकराचार्य ने गौ-सेवा, भारतीय संस्कृति, धर्म और राजनीति से जुड़े कई मुद्दों पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने उपनिषद में वर्णित सत्यकाम जाबाल की कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि गौ-सेवा केवल धार्मिक कर्म नहीं बल्कि आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम भी है।

उन्होंने कहा कि सत्यकाम जाबाल को उनके गुरु ने कक्षा में बैठाकर शिक्षा नहीं दी थी, बल्कि 400 दुबली-पतली गायों की सेवा के लिए गौशाला भेजा था। वर्षों तक गौ-सेवा करने के बाद जब गायों की संख्या बढ़कर एक हजार हुई, तब सत्यकाम लौटे और उनके चेहरे पर ब्रह्मज्ञान का तेज दिखाई दिया। जगद्गुरु ने कहा कि यह गौ-सेवा की शक्ति थी जिसने उन्हें ब्रह्मज्ञानी बना दिया।

उन्होंने कहा, “जो व्यक्ति गाय में केवल दूध देखता है उसे दूध मिलता है, लेकिन जो गाय में दैवीय शक्ति और मातृत्व देखता है, उसे ईश्वरीय कृपा प्राप्त होती है।” उन्होंने गौ-सेवा को भारतीय ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण आधार बताया।

सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने ‘वात्सल्य’ शब्द की व्याख्या भी की। उन्होंने कहा कि संस्कृत में मां के प्रेम को ‘वात्सल्य’ कहा जाता है और यह शब्द ‘वत्स’ यानी बछड़े से बना है। गाय अपने बछड़े को जिस प्रकार प्रेम करती है, उसी भाव को वात्सल्य कहा गया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में मातृत्व और करुणा की अवधारणा भी गौ माता से जुड़ी हुई है।

जगद्गुरु शंकराचार्य ने अपने संबोधन में राजनीतिक दोहरेपन पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कुछ लोग सत्ता से पहले गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने की मांग करते हैं, लेकिन सत्ता मिलने के बाद उनके विचार बदल जाते हैं। उन्होंने कहा कि धर्म को सुविधा के अनुसार नहीं, बल्कि जीवन के आधार के रूप में स्वीकार करना चाहिए।

उन्होंने धर्म को लेकर दो प्रकार की मानसिकता का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार कुछ लोग धर्म को ‘धरातल’ मानते हैं, जबकि कुछ लोग धर्म को केवल ‘सीढ़ी’ की तरह उपयोग करते हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग धर्म को जीवन का आधार मानते हैं, वे हर परिस्थिति में धर्म के साथ खड़े रहते हैं।

अपने संबोधन में उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि अंग्रेजों के समय भारत में गायों की हत्या का विरोध स्वतंत्रता आंदोलन की नैतिक ताकत बना था, लेकिन आज स्थिति बदल चुकी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भारत से बड़े स्तर पर बीफ निर्यात हो रहा है, जो चिंताजनक विषय है।

सभा के दौरान गौधाम निर्माण के लिए स्थानीय स्तर पर जनसहभागिता का भी आह्वान किया गया। इस दौरान श्री अब्दुल्ला यादव को गौधाम निर्माण अभियान के लिए प्रतिनिधि नियुक्त किया गया। उनके नेतृत्व में एक समिति गठित की गई, जो गांव-गांव जाकर लोगों से ₹1 से ₹500 तक का अंशदान एकत्र करेगी। इस राशि से गौधाम निर्माण की योजना तैयार की जाएगी।

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों से सामूहिक संकल्प भी दिलाया गया। लोगों ने घोषणा की कि वे गौ माता की रक्षा के मुद्दे को प्राथमिकता देंगे और भविष्य में मतदान करते समय इस विषय को ध्यान में रखेंगे।

जगद्गुरु शंकराचार्य ने कहा कि 3 मई 2026 को गोरखपुर से शुरू हुई यह ‘गविष्ठि यात्रा’ उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभाओं तक पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि यदि यात्रा पूर्ण होने तक गौ-रक्षा को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो 24 जुलाई 2026 को लखनऊ में विशाल धर्मसभा आयोजित कर आगे की रणनीति घोषित की जाएगी।

कार्यक्रम के अंत में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गौ-रक्षा और गौ-सेवा के समर्थन में संकल्प लिया। पूरे आयोजन के दौरान धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण बना रहा।

Dr. Bhanu Pratap Singh