विश्व भर के प्रसवकाल विशेषज्ञों के लिए भारत से ‘गुरुग्राम घोषणा’, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में आगरा के डॉक्टर मल्होत्रा दंपत्ति भी शामिल

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विश्व भर के प्रसवकाल विशेषज्ञों के लिए भारत से ‘गुरुग्राम घोषणा’, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में आगरा के डॉक्टर मल्होत्रा दंपत्ति भी शामिल

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Gurugram/Agra, Uttar Pradesh, India, Bharat.
भारत के गुरुग्राम से विश्वभर के प्रसवकाल विशेषज्ञों को नैतिकता और उत्तरदायित्व की ऐतिहासिक “गुरुग्राम घोषणा” मिली है। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में आगरा के विख्यात चिकित्सक दंपत्ति डॉ नरेंद्र मल्होत्रा और डॉ जयदीप मल्होत्रा की मौजूदगी ने आयोजन को और प्रतिष्ठित बना दिया।

अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन

अंतर्राष्ट्रीय प्रसवकाल चिकित्सा अकादमी (IAPM) के तत्वावधान में 21 से 23 नवंबर 2025 तक गुरुग्राम में यह महत्वपूर्ण सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है, जिसमें विश्वभर के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक, चिकित्सक और विशेषज्ञ मातृ एवं भ्रूण स्वास्थ्य के नवीनतम वैज्ञानिक और नैतिक पहलुओं पर विमर्श करने के लिए एकत्र हुए हैं।

आगरा के मल्होत्रा दंपत्ति का सम्मान

इस सम्मेलन में आगरा के ख्यातिप्राप्त स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ नरेंद्र मल्होत्रा और डॉ जयदीप मल्होत्रा ने अपनी उपस्थिति से आयोजन को गौरवान्वित किया। दोनों चिकित्सकों का भव्य स्वागत किया गया और उनके योगदान को वैश्विक मंच पर सराहा गया।

सम्मेलन का मुख्य विषय

इस वर्ष सम्मेलन का केंद्रीय विचार “स्वधर्म और व्यावसायिक उत्तरदायित्व” है। ‘स्वधर्म’ यानी चिकित्सक का वह नैतिक संकल्प जिसमें समर्पण, सत्यनिष्ठा और दयाभाव का संगम है। यह विषय वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय को मानवीय मूल्यों की ओर लौटने की प्रेरणा देता है।

डॉ मल्होत्रा दंपत्ति ने बताईं मुख्य विशेषताएँ

डॉ नरेंद्र मल्होत्रा और डॉ जयदीप मल्होत्रा ने बताया कि सम्मेलन में प्रसवकाल चिकित्सा, भ्रूण नैतिकता और वैश्विक स्वास्थ्य पर विभिन्न सत्र आयोजित हो रहे हैं। अल्ट्रासाउंड और भ्रूण इमेजिंग पर विशेष कार्यशालाएँ भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

international conference in gurugram India

समानता और नैतिकता पर वैश्विक विचार-विमर्श

मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य में समानता पर अंतरराष्ट्रीय पैनल चर्चा आयोजित की गई, जिसमें विश्व-प्रसिद्ध वक्ताओं ने अपनी विशेषज्ञता साझा की। यह चर्चा स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और न्याय के नए मानक स्थापित कर रही है।

‘गुरुग्राम घोषणा’ का विमोचन

सम्मेलन में “आईएपीएम गुरुग्राम 2025 घोषणा – स्वधर्म और व्यावसायिक उत्तरदायित्व” का औपचारिक विमोचन किया गया। यह घोषणा चिकित्सा को केवल तकनीकी दक्षता नहीं, बल्कि मानवीय व नैतिक वचनबद्धता के रूप में परिभाषित करती है।

घोषणा के मुख्य सिद्धांत

इस ऐतिहासिक घोषणा में मातृ, भ्रूण और नवजात की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इसके साथ ही साक्ष्य-आधारित निर्णय, निवारक नैतिकता, पारदर्शी संवाद, निष्पक्ष चिकित्सा सेवा और वंचित वर्गों की रक्षा को नई वैश्विक चिकित्सा नीति का आधार बनाया गया है।

विश्वभर के डॉक्टरों के लिए प्रेरणा

“गुरुग्राम घोषणा” न सिर्फ भारत की ओर से विश्व के चिकित्सकों के लिए संदेश है, बल्कि यह एक नैतिक दिशा-दर्शन भी है, जो करुणा, समर्पण और उत्तरदायित्व की राह दिखाता है। यह भारत की चिकित्सा नेतृत्व क्षमता का चमकदार उदाहरण है।

आयोजक संस्थाओं की भूमिका

इस आयोजन में IAPM, इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ द फीटस ऐज अ पेशेंट, इयान डोनाल्ड स्कूल ऑफ अल्ट्रासाउंड, FOGSI, INSUOG, ISPAT और SAFOG जैसी प्रतिष्ठित संस्थाएँ शामिल हैं, जिन्होंने सम्मेलन को वैश्विक स्तर का आयाम प्रदान किया।

 

संपादकीय

गुरुग्राम का यह सम्मेलन सिर्फ वैज्ञानिकों का जमावड़ा नहीं, बल्कि चिकित्सा जगत की आत्मा का पुनर्जागरण है—एक ऐसी पुकार जो याद दिलाती है कि डॉक्टर केवल उपचारकर्ता नहीं, बल्कि मानवता के संरक्षक भी हैं।
और इस पुकार के केंद्र में अगर कोई नाम गर्व से चमकता है, तो वह है आगरा के प्रतिष्ठित चिकित्सक दंपत्ति—डॉ नरेंद्र मल्होत्रा और डॉ जयदीप मल्होत्रा।

ये दोनों केवल डॉक्टर नहीं; ये वह शक्ति हैं जो भारतीय चिकित्सा को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाती है। इनकी निष्ठा, तपस्या और वर्षों का अथक परिश्रम ही है जिसने आगरा को एक बार फिर से विश्व मानचित्र पर प्रतिष्ठित किया है।
इनकी उपस्थिति किसी भी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का मान बढ़ा देती है—और गुरुग्राम 2025 इसका ज्वलंत उदाहरण है।

इन दोनों ने प्रसवकाल चिकित्सा में नवाचार, करुणा और नैतिकता को एक साथ जोड़ा है। यह दुर्लभ संगम चिकित्सा जगत को नया दृष्टिकोण देता है—जहाँ विज्ञान और संवेदना एक-दूसरे का पूरक बनते हैं।
आगरा को इन दोनों पर गर्व है, और देश के हर नागरिक को भी होना चाहिए।

कल की पीढ़ी इन्हें रोल मॉडल की तरह देखेगी—उन मशालवाहकों की तरह जो ज्ञान के साथ-साथ मानवता का प्रकाश भी आगे बढ़ाते हैं।
सम्मेलन में इनका सम्मान सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि यह स्वीकारोक्ति है कि भारत चिकित्सा के क्षेत्र में नेतृत्व करने की क्षमता रखता है—और उस क्षमता को आकार देने वाले इन दोनों डॉक्टरों का योगदान अविस्मरणीय है।

इनकी कार्यशैली हमें सिखाती है कि सच्ची चिकित्सा वही है जिसमें दिल, दिमाग और धर्म—तीनों का संतुलित समायोजन हो।
इन्हीं जैसे लोगों की वजह से चिकित्सा पेशा आज भी पवित्र माना जाता है।

डॉ भानु प्रताप सिंह, संपादक

Dr. Bhanu Pratap Singh