Agra (Uttar Pradesh, India) । एक डॉक्टर का दायित्व अपने मरीजों के प्रति और एक मां का दायित्व अपने बच्चों के प्रति होता है. सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज की सर्जरी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. रिचा जेमन एक डॉक्टर भी हैं और दो छोटे बच्चों की मां भी हैं. उन्होंने कोविड-19 के इस दौर में पहली प्राथमिकता अपने मरीजों को दी है. क्योंकि इस वक्त उनके पेशेंट्स को उनकी ज्यादा जरूरत है. उन्होंने पिछले दिनों एक दस साल की बच्ची की आंतों की सर्जरी की थी. केस काफी कॉम्पलिकेटेड था. बच्ची की आंतें गल गई थीं और चिपक गई थी. इसके साथ ही एक और परेशानी ये कि बच्ची कोविड पॉजिटिव थी. डॉ. रिचा ने अपनी टीम के साथ बच्ची की सफल सर्जरी की और बच्ची अब ठीक है. ये पूरे प्रदेश में इस तरह का पहला मामला है, जब कोविड पॉजिटिव बच्ची का इतना कॉम्पलिकेटेड ऑपरेशन किया गया हो. अब उस बच्ची को कोरोनावायरस का संक्रमण खत्म होने के बाद नॉन कोविड वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है. जल्दी ही बच्ची को डिस्चार्ज कर दिया जाएगा.
किये कई कॉम्पलिकेट ऑपरेशन
डॉ. रिचा ने कोविड के पीरियड में कई कॉम्पलिकेट ऑपरेशन किये हैं. फिलहाल उन्होंने कैंसर मरीज का कृत्रिम जबड़ा लगाकर ऑपरेशन किया था. ये भी एसएन के लिए एक उपलब्धि के समान था. एसे ऑपरेशन के लिए अक्सर दिल्ली या लखनऊ का रुख करना पड़ता है. वे बताती हैं कि पहले सर्जरी बंद थी लेकिन अब शुरू होने के बाद लगातार मरीजों की सर्जरी की जा रही है. हम कोविड के इस दौर में अपनी और मरीज की सुरक्षा का ध्यान रखते हैं. सुरक्षा उपकरण पहनने के बाद ही सर्जरी की जाती है.
बच्चों से रह रहीं दूर
डॉ. रिचा ने अपने कोविड-19 से लड़ाई में अपने मरीजों का इलाज करने के लिए तीन महीने से अपने बच्चों से अलग हैं. इन दिनों अपने बच्चों को अपने पैरेंट्स के घर छोड़ दिया है. उनके दो छोटे बच्चे (एक 6 साल और दूसरा 12 साल का) हैं. दोनों बच्चे उन्हें लगातार याद कर रहे हैं. लेकिन उन्हें अपने मरीजों के प्रति धर्म भी निभाना है, लेकिन इस बीच उनके बच्चे भी इंफेक्शन का शिकार होने का खतरा है. इसलिए उन्होंने इन दिनों बच्चों को अपने पैरेंट्स के घर छोड़ने का फैंसला किया है. डॉ. रिचा बताती हैं कि कोविड के शुरूआती दिनों में जब वे हॉस्पिटल से घर आती थीं तो छोटे बच्चे उनके घर आते ही उन्हें हग करने लगते. उन्होंने इसके बाद फैंसला किया कि वे बच्चों को खुद से दूर रखेंगी. अब वे अपने बच्चों को काफी मिस करती हैं. फिलहाल फोन से ही उन्हें टाइम देती हैं.
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