डाक्टर्स डे: पिता के सपनों को पंख दे अवधेश बने डॉक्टर

डाक्टर्स डे: पिता के सपनों को पंख दे अवधेश बने डॉक्टर

HEALTH REGIONAL

Hathras (Uttar Pradesh, India) । हर साल जुलाई की 01 तारीख को डॉक्टर विधान  चंद राय के सम्मान में डाक्टर्स डे मनाया जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों के अस्पताल और क्लीनिक में इस दिन लोग चिकित्सकों को बधाई देते हैं और उनके प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हैं। कोरोना काल में यह साबित हो गया कि भगवान का दर्जा प्राप्त डॉक्टर वाकई भगवान का दूसरा रूप हैं | कितनी भी परेशानी झेल कर माथे पर सिकन आए बगैर लोगों की जान बचाने में वह जुटे रहे । ऐसे में उन्होंने खुद की जान की फ़िक्र भी नहीं की।

हाथरस जिले के सहपऊ क्षेत्र में तैनात डॉ. अवधेश कुमार वार्ष्णेय राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में आयुष चिकित्सा अधिकारी हैं। वह बताते हैं कि जब वह  कक्षा 10 में थे तब पिता की बात से प्रभावित होकर डॉक्टर बनने का सपना देखा। डॉ. अवधेश का कहना है कि  उनके जीवन का लक्ष्य है कि वह एक सफल डॉक्टर बने पैसे के लिए नहीं बल्कि लोगों की सहायता के लिए।  वह चाहते हैं कि उन सभी की मदद कर सकें जो गरीब है, बीमार है और वह अपने पिता के आशीर्वाद से सपने को हकीकत में बदल कर यह कार्य कर रहे हैं।

लौटा रहे मासूमों के चेहरों पर मुस्कान
डॉ. अवधेश कुमार वार्ष्णेय का 2012 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में चयन  हुआ और तभी से वह राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में आयुष चिकित्सा अधिकारी के पद पर तैनात हैं। वह शून्य वर्ष से लेकर 19 वर्ष तक के सभी बच्चों का आंगनवाड़ी व  इंटर कॉलेज के माध्यम से सभी का स्वास्थ्य परीक्षण कर बर्थ डिफेक्ट्स डेफिशियेंसी डिजीज एवं अन्य बीमारियों को पता कर उनका इलाज शासन के दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार मुफ्त में कराते हैं। उन्होंने बताया पिछले वर्ष 4 बच्चों के दिल में सुराख थे जो प्राइवेट इलाज कराने में असमर्थ थे उनका इलाज सरकारी खर्चे पर हुआ और उनके परिवार के लोगों को चेहरे पर मुस्कान लौटी जिसे देखकर उन्हें भी प्रसन्नता हुई।

ये कहते है अवधेश 
डॉटर्स डे पर वह अपने साथियों से यही कहना चाहते हैं कि डॉक्टर का पेशा एक ऐसी उपलब्धि है, एक ऐसा पद होता है जहां पर एक इंसान डॉक्टर को भगवान समझकर अपना इलाज कराने आते हैं। तो उस समय पैसे को  महत्व ना देकर भी मानवता दिखानी चाहिए और मरीजों को भी यह समझना चाहिए। डॉक्टरों को अपनी जिम्मेदारियों को महसूस करने के अलावा लोगों को भी इसे पहचानना चाहिए और समझना चाहिए कि वह भी एक इंसान है बल्कि डॉक्टर लोगों के स्वास्थ्य की भलाई के लिए प्रयास करते हैं।

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