नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज 8वें वेतन आयोग के गठन का रास्ता साफ कर दिया है। इससे एक करोड़ से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को फायदा होगा। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यह बहुप्रतीक्षित घोषणा की। इस आयोग से वेतन, भत्ते, पेंशन और अन्य लाभों में संशोधन की उम्मीद है। यह आयोग 2026 तक अपनी सिफारिशें देगा, क्योंकि 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें 2025 के अंत में समाप्त हो रही हैं। 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें जनवरी 2016 में लागू हुई थीं।
8वां वेतन आयोग कर्मचारियों के वेतन ढांचे की समीक्षा करेगा। इसमें महंगाई, आर्थिक स्थिति और कर्मचारी कल्याण जैसे पहलुओं पर विचार किया जाएगा। यह आयोग सरकारी कर्मचारियों की जरूरतों को पूरा करने के लिए हर 10 साल में गठित किया जाता है। पिछले आयोगों ने वेतनमान, भत्ते और पेंशन को समय के साथ बदलती आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार समायोजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
वैष्णव ने कहा, ‘1947 से अब तक सात वेतन आयोग गठित किए जा चुके हैं। आखिरी आयोग 2016 में लागू हुआ था। चूंकि 7वें वेतन आयोग का कार्यकाल 2026 में समाप्त हो रहा है, इसलिए 2025 में प्रक्रिया शुरू करने से सिफारिशें प्राप्त करने और उनकी समीक्षा करने के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा।’
इस घोषणा से कर्मचारियों और सेवानिवृत्त लोगों में आशा की किरण जगी है। उन्हें उम्मीद है कि 8वां वेतन आयोग उनकी लंबे समय से चली आ रही चिंताओं का समाधान करेगा। यह ऐसे सुधार लाएगा जिनसे कर्मचारियों की जिंदगी की गुणवत्ता में सुधार आएगा। इससे देश के आर्थिक विकास में उनका योगदान मिलेगा।
कुछ रिपोर्ट्स बताती हैं कि 8वां वेतन आयोग फिटमेंट फैक्टर को 2.57 से बढ़ाकर 2.86 करने का प्रस्ताव रख सकता है। इससे न्यूनतम मूल वेतन 51,480 रुपये हो जाने की संभावना है। इस तरह के कदम से कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है। उनकी खर्च करने की क्षमता बढ़ सकती है। इससे उपभोक्ता खर्च भी बढ़ सकता है। 2014 में गठित और 2016 में लागू 7वें वेतन आयोग ने कई महत्वपूर्ण बदलाव किए। इसने वेतन बैंड को सरल वेतन मैट्रिक्स से बदल दिया।
न्यूनतम मासिक वेतन 18,000 रुपये कर दिया गया। शीर्ष सरकारी अधिकारियों के लिए अधिकतम मासिक वेतन 2.5 लाख रुपये तय हुआ। इसने फिटमेंट फैक्टर को भी 2.57 तक बढ़ा दिया, जिससे मूल वेतन में अच्छी बढ़ोतरी हुई। फिटमेंट फैक्टर एक मल्टीपल है जिसका इस्तेमाल वेतन आयोग के तहत सरकारी कर्मचारियों के संशोधित मूल वेतन कैलकुलेशन के लिए किया जाता है।
आयोग के गठन और समयसीमा के बारे में अधिक जानकारी का इंतजार है। लेकिन, इस घोषणा ने कर्मचारियों और सेवानिवृत्त लोगों में उत्साह भर दिया है। वेतन आयोग का गठन सरकारी कर्मचारियों की बदलती जरूरतों को पूरा करने के लिए हर 10 साल में होता है।
सालों से ये आयोग वेतनमान, भत्ते और पेंशन को समायोजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आए हैं। ये सुनिश्चित करते हैं कि वे महंगाई और बदलती आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप हों। कर्मचारी और पेंशनभोगी आशा करते हैं कि 8वां वेतन आयोग उनकी चिंताओं का समाधान करेगा। साथ ही, ऐसे सुधार लाएगा जिससे उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा।
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