Hathras (Uttar Pradesh, India) । कृमि रोग अर्थात पेट में कीड़े होना एक साधारण बीमारी समझी जाती है। मगर इसका इलाज न किया जाए तो यह रोग कई जटिलताएं जैसे रक्ताल्पता, कुपोषण, आंतों में रुकावट, एलर्जी अादि जानलेवा रोगों का कारण भी बन सकता है। भारत सरकार के अनुसार उत्तर प्रदेश में 1 से 19 वर्ष के बच्चों में कृमि संक्रमण 76% है। कृमि रोग से बचाव के लिए भारत सरकार द्वारा प्रत्येक वर्ष 2 बार 10 फरवरी और 10 अगस्त को राष्ट्रीय कृमिमुक्ति दिवस मनाया जाता है। जिसमें 1 से 19 साल तक के बच्चों को दवाएं प्रदान की जाती हैं।
नोडल/ एसीएमओ डॉ विजेंद्र सिंह ने बताया इस वर्ष अगस्त में प्रथम चरण में हाथरस सहित चयनित 11 जनपदों में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस 1 दिन के लिए ना होकर 10 अगस्त से लेकर अगले 10 दिनों के लिए चलाया जा रहा है। वर्तमान में कोविड-19 संक्रमण के कारण विद्यालय एवं आंगनवाड़ी केंद्र बंद है अतः फ्रंटलाइन वर्कर आशा एवं आंगनवाड़ी के सहयोग से घर-घर जाकर आशा व आंगनवाड़ी द्वारा समस्त 1 से 19 वर्ष के 649720 बालक, बालिकाओं एवं किशोरों को एल्बेंडाजोल की गोलियां खिलाई जाएंगी। ना सिर्फ घर-घर जाकर, बल्कि ईट भट्टों आदि पर कार्य करने वाले श्रमिकों एवं घुमंतू लाभार्थियों के सभी बालक बालिकाओं को यह गोली खिलाई जाएगी। आशा में आंगनवाड़ी प्रतिदिन 25 से 30 घरों में भ्रमण कर बच्चों एवं गोली खिलाएंगे तथा घर पर चौक से मार्क करेंगी कि उस घर मे कितने लाभार्थी बच्चों के सापेक्ष कितने बच्चों को गोली खिलाई गई ।
पेट के कीड़ों की गोली एल्बेंडाजोल को 1 से 2 वर्ष के बच्चों को 200 मिलीग्राम अर्थात आधी गोली तथा 2 से 19 वर्ष के बच्चों को 400 मिलीग्राम अर्थात पूरी गोली खिलाई जानी हैं। कार्यक्रम संबंधित जनपद तथा ब्लॉक स्तरीय अंतर विभागीय अभिमुखीकरण कार्यशाला का संपादन जिला स्तर पर किया जा चुका है जिसमें मुख्य चिकित्सा अधिकारी, डीपीओ, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, सीडीपीओजिला स्वास्थ शिक्षा अधिकारी , डीसीपीएम,तथा अन्य कार्यक्रम से संबंधित अधिकारी व कर्मचारियों ने भाग लिया।
गोली खिलाने से संबंधित दिशा-निर्देश बैठक में दिए गए। जिसने बताया गया कि गोली को उम्र के अनुसार सही मात्रा में ही देना है। गोली को पीसकर तथा स्वच्छ जल के साथ में बच्चे को कुछ खाद्य पदार्थ खाने के बाद ही देना है। यदि बच्चा बीमार है और अन्य दवाई ले रहा है तो उसे एल्बेंडाजोल की गोली का सेवन नहीं कराना है तथा जबरदस्ती भी दवा को नहीं देना है। माता-पिता को गोली घर पर रखने या बाद में खिलाने हेतु ना दी जाए।
10 अगस्त से चलने वाले राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के सम्बन्ध में जिलाधिकारी की अद्दक्षयता तथा मुख्य विकास अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, स्वास्थ्य व आई सी डी एस विभाग के अधिकारीयों की बैठक का आयोजन कलेक्ट्रेट सभागार में किया गया। जिसमे कार्यक्रम सम्बन्धित दिशा निर्देश दिए गए।
कृमि रोग के लक्षण है
1. अनायास मिचली या उल्टियां होना।
2. दस्त होना।
3. पेट दर्द।
4. बच्चे दुबले और कमजोर हो जाते हैं।
5. ये कीड़े कभी-कभी उल्टी में मुंह अथवा नाक, मल द्वार से बाहर भी निकल सकते हैं।
6. कुछ बच्चे या बड़े कृमि रोग के कारण दमा जैसे लक्षणों अर्थात् सांस फूलना, खांसी आना इत्यादि के शिकार हो जाते हैं।
7. कई एलर्जी के लक्षण उत्पन्न करते हैं।
सावधानियां
1. सब्जियां और फलों का उपयोग खूब अच्छी तरह धोकर इस्तेमाल करें।
2. नानवेज पसंद करने वाले सुअर व गाय के मांस से बचें और कम पका या अधपका मांस भी न खाएं।
3. स्वच्छ पानी ही पियें, इसके लिये फिल्टर का उपयोग करें या आवश्यकतानुसार पानी को उबालकर पीना चाहिये।
4. घरों में मल एवं गंदगी के निकास की उचित व्यवस्था करवाएं। जहां तक संभव हो शौचालय कुछ अलग स्थान में रखने चाहिए।
5. कुंओं और जलाशयों की नियमित सफाई आवश्यक है। ऐसे स्थानों के पास अथवा खेत इत्यादि में शौच क्रिया न करें।
6. चिकित्सक की सलाह पर वर्ष में एक या दो बार कृमिनाशक दवाइयों का सेवन भी किया जा सकता है।
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