भक्ति और प्रकाश का अनुपम संगम: श्री प्रेमनिधि मंदिर में दीपावली उत्सव के साथ संपन्न हुआ पुरुषोत्तम मास महोत्सव, हटरी मनोरथ पर दर्शन को उमड़ी भीड़

RELIGION/ CULTURE

आगरा। नाई की मंडी स्थित ऐतिहासिक श्री प्रेमनिधि मंदिर में चल रहा एक माह का ‘श्री पुरुषोत्तम (अधिक मास) मनोरथ महोत्सव’ सोमवार को दीपावली उत्सव और हटरी मनोरथ के साथ अत्यंत भावपूर्ण और उल्लासपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। मंदिर परिसर दीपों की झिलमिलाती रोशनी और दिव्य सजावट से जगमगा उठा, जहाँ हर कोने से प्रभु भक्ति की महक आ रही थी।

हटरी मनोरथ: प्रभु के साथ बाजार की अद्भुत झांकी

पुष्टिमार्गीय परंपरा के अनुसार, इस विशेष दिवस पर ‘हटरी मनोरथ’ सजाया गया, जो महोत्सव का मुख्य आकर्षण रहा। ठाकुर श्री श्याम बिहारी (श्री बड़े गोविन्द) जी महाराज को ग्वाल स्वरूप में दिव्य मणिकांचन सिंहासन पर विराजमान किया गया। उनके समक्ष एक प्रतीकात्मक बाजार सजाया गया, जिसे देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। मान्यता है कि इस विशेष मनोरथ के माध्यम से प्रभु अपने भक्तों को प्रेम और अनुग्रह का प्रसाद प्रदान करते हैं।

मुख्य सेवाधिकारी हरिमोहन गोस्वामी ने कहा कि दीपावली का यह प्रकाश केवल बाहरी अंधकार को मिटाने के लिए नहीं, बल्कि मन के अज्ञान और अहंकार का नाश कर जीव को प्रभु के और करीब लाने का प्रतीक है।

अलौकिक श्रृंगार और विशेष भोग

दीपावली मनोरथ के अवसर पर ठाकुर जी का अद्भुत श्रृंगार किया गया। प्रभु को नवीन वस्त्रों और मणियों-स्वर्ण के आभूषणों से अलंकृत किया गया। सेवाधिकारी सुनीत गोस्वामी ने बताया कि पुष्टिमार्गीय रीति-नीति से राजभोग में प्रभु को मनोहर, विविध प्रकार के मिष्ठान्न और पारंपरिक व्यंजनों का भोग अर्पित किया गया। संध्याकाल में जब महाआरती हुई, तो मंदिर परिसर ‘जय श्री कृष्ण’ और ‘श्री वल्लभाधीश की जय’ के उद्घोषों से गुंजायमान हो उठा।

एक महीने तक चला भक्ति का महायज्ञ

मंदिर प्रशासक दिनेश पचौरी ने जानकारी दी कि 17 मई से शुरू हुआ यह महोत्सव धर्म और संस्कृति का अनूठा समागम रहा। इन 30 दिनों में वर्ष भर आने वाले प्रमुख त्योहारों को मनोरथ के स्वरूप में मनाया गया, जिससे क्षेत्र में आध्यात्मिक चेतना का संचार हुआ।

इस पूरे आयोजन में मनीष अग्रवाल (रावी), शिवानी अग्रवाल, उज्ज्वल, कृष्णा, पंकज अग्रवाल, नीलू अग्रवाल और प्रणव अग्रवाल का विशेष सहयोग रहा।

​महाआरती के बाद उपस्थित वैष्णव भक्तों में महाप्रसाद का वितरण किया गया। दीपों की दिव्य आभा के बीच अधिकमास मनोरथ महोत्सव का समापन हुआ, जिसने सभी भक्तों के मन में अमिट छाप छोड़ दी।

Dr. Bhanu Pratap Singh