आगरा। शहर के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र संजय प्लेस में हुई मारपीट की घटना ने अब एक गंभीर सामाजिक और प्रशासनिक मोड़ ले लिया है। एक ओर व्यापारी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए धरने पर बैठे हैं, तो दूसरी ओर वाल्मीकि समाज ने जातिसूचक शब्दों के प्रयोग और मारपीट के आरोपों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। इस विवाद ने अब प्रशासनिक तंत्र के लिए चुनौती खड़ी कर दी है।
”पीड़ितों पर मुकदमा और हमलावरों को छूट”
वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधियों का आरोप है कि घटना के दौरान न केवल उनके समाज के दो युवकों को बेरहमी से पीटा गया, बल्कि उन्हें जातिसूचक शब्दों से अपमानित भी किया गया। समाज के नेताओं का कहना है कि पुलिस ने उल्टा पीड़ित पक्ष के खिलाफ ही मुकदमा दर्ज कर दिया, जो सरासर अन्याय है। वाल्मीकि महापंचायत के अध्यक्ष तख्त चौधरी गौरव वाल्मीकि ने स्पष्ट किया है कि जब तक आरोपियों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट और हत्या के प्रयास (धारा 307) के तहत मुकदमा दर्ज नहीं किया जाता, समाज का विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
सीसीटीवी फुटेज से बड़ा विवाद
घटना के वायरल सीसीटीवी फुटेज ने आग में घी डालने का काम किया है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि हमलावर एक युवक को गिराकर पीट रहे हैं। जब दूसरा युवक उसे बचाने के लिए डंडा लेकर आता है, तो हमलावर उसके साथ भी मारपीट करते हैं। यह फुटेज अब दोनों पक्षों के बीच बहस का मुख्य आधार बन गया है। जहाँ वाल्मीकि समाज इसे जानलेवा हमला बता रहा है, वहीं पुलिस इस पर अपनी जांच को लेकर सतर्क है।
पुलिस का पक्ष और बढ़ता दबाव
विवाद को नियंत्रित करने के प्रयास में पुलिस ने सफाई दी है कि इस मामले में दो युवकों के खिलाफ धारा 151 (शांति भंग) के तहत कार्रवाई पहले ही की जा चुकी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की जांच की जा रही है। हालांकि, यह कार्रवाई न तो व्यापारियों को संतुष्ट कर पा रही है और न ही वाल्मीकि समाज को। व्यापारी भी पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप लगा रहे हैं, जिससे पुलिस की भूमिका पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
सफाई व्यवस्था ठप करने की चेतावनी
विवाद का एक बड़ा असर मंगलवार को शहर की सफाई व्यवस्था पर पड़ सकता है। वाल्मीकि समाज ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई, तो वे संजय प्लेस क्षेत्र की सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप कर देंगे। यदि ऐसा होता है, तो शहर का यह सबसे व्यस्त व्यावसायिक केंद्र बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।
अब सबकी निगाहें सोमवार को पुलिस आयुक्त को सौंपी जाने वाली शिकायत और उसके बाद होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। प्रशासन के सामने चुनौती है कि वह कैसे कानून-व्यवस्था को बनाए रखे और दोनों पक्षों के बीच बढ़ते तनाव को शांत करे।
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