ईपीआईपी से किया शुभारंभ, कोविड-19 के इलाज में उपयोगी हैं ये पौधे, सामाजिक संस्थाओं से आगे आने का आह्वान
Agra (Uttar Pradesh, India)। भारतीय ग्रंथों और वेद पुराणों की मानें तो इस चराचर जगत में जो भी घटता है, व सब ग्रह-नक्षत्रों से नियंत्रित और प्रभावित है। मानव जीवन में ग्रह और नक्षत्रों का महती महत्व है। शासन भी इस बात को मान रहा है। तभी तो उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रह और नक्षत्रों के हिसाब से भी पौधारोपण शुरू किया है। नवग्रह वाटिका में नवग्रह से संबंधित नौ पौधे रोपे जाते हैं। नक्षत्र वाटिका में 27 नक्षत्रों से संबंधित 27 पौधे रोपे जाते हैं। आगरा विकास मंच ने वन महोत्सव के अंतर्गत अशोक नक्षत्र वाटिकाओं का निर्माण शुरू कर दिया है। पहले दिन निर्यात प्रोत्साहन औद्योगिक पार्क (ईपीआईपी) शास्त्रीपुरम में नक्षत्र वाटिका से अंतर्गत 27 प्रकार के पौधे रोपे गए। इन पौधों से कोविड-19 के इलाज की दवा भी बनती है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि यूपीएसआईडीसी के क्षेत्रीय प्रबंधक विनोद कुमार सिंह ने अशोक नक्षत्र वाटिका में पौधे रोपकर शुभारंभ किया। उन्होंने इस नेक कार्य के लिए आगरा विकास मंच को धन्यवाद दिया।
पर्यावरण का संरक्षण
इस मौके पर आगरा विकास मंच के अध्यक्ष राजकुमार जैन और संयोजक सुनील कुमार जैन ने बताया कि ये सभी पौधे हमें औषधि, फल, फूल, शीतल छाया और शुद्ध वायु प्रदान करते हैं। साथ ही पर्यावरण का संरक्षण करते हैं। याद रखें कि आगरा को जीवंत बनाए रखने के लिए पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। आगरा विकास मंच इसी कर्तव्य को पूरा कर रहा है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में शहर के विभिन्न स्थानों पर नक्षत्र वाटिका मानसून ऋतु में बनाई जाएंगी। अशोक नक्षत्र वाटिकाओं की देखभाल संबंधित संस्था या आगरा विकास मंच करेगा। देखा गया है कि सरकारी संस्थाएं पौधारोपण कर पौधों को भूल जाती हैं, लेकिन नक्षत्र वाटिका में लगे सभी पौधे लहलहाएंगे।
संस्थाओं की मदद के लिए तैयार
मंच के प्रवक्ता संदेश जैन ने बताया ईपीआईपी के अलावा रामलाल आश्रम, जैन दादाबाड़ी और अहिंसा पार्क जयपुर हाउस में नक्षत्र वाटिका स्थापित की जाएंगी। महामंत्री सुशील जैन ने बताया कि अगर कोई संस्था ‘अशोक नक्षत्र वाटिका’ लगाना चाहती है तो उसकी भी मदद की जाएगी। इस मौके पर यूपीएसआईडीसी के इंजीनियर दिनेश गर्ग, संयोजक अरविंद शर्मा गुड्डू, महेंद्र जैन आदि उपस्थित थे।
नक्षत्र और संबंधित पौधे
नक्षत्र वाटिका में नक्षत्र और संबंधित पौधे का नाम इस प्रकार है – अश्विनी नक्षत्र का कुचला, भरणी-आँवला, कृत्तिका-उदुंबर/गूलर, रोहिणी-जामुन, मृगशिरा-खैर, आर्द्रा-कृष्णागुरु, पुनर्वसु-बाँस, पुष्य-पीपर, अश्लेषा-चंपा, मघा-बड़वट, पूर्वा फाल्गुनी-पलाश, उत्तरा फाल्गुनी-कनेर, हस्त-चमेली, चित्रा-बेल, स्वाति-कांहा/कोह, विशाखा-कैथ, अनुराधा-मौलसरी, ज्येष्ठा-शाल्मली/सेवर, मूल-साल/सखुआ, पूर्वाषाढ़ा-वैंत, उत्तराषाढ़ा-कटहल, श्रवण-आंकड़ा, धनिष्ठा-समी/सफेद कीकर, शतभिषा-कदंब, पूर्वभाद्रपदा-आम, उत्तराभाद्रपदा-नीम और रेवती-महुआ।
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