आगरा: हथियारों की खरीद-फरोख्त में फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद प्रशासन ने जिले के सभी 52 हजार शस्त्र लाइसेंसों की जांच कराने का निर्णय लिया है। जांच के लिए पुलिस से थानावार लाइसेंसों की सूची मांगी गई है। एसटीएफ द्वारा सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराए जाने के बाद प्रशासन को अन्य शस्त्र लाइसेंसों में भी गड़बड़ियों की आशंका है। माना जा रहा है कि दूसरे जिलों से स्थानांतरित लाइसेंसों में स्टांप ड्यूटी, शुल्क, मुहर व हस्ताक्षर में फर्जीवाड़े के कुछ और मामले सामने आ सकते हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, जिन फर्जी लाइसेंस से हथियारों का क्रय-विक्रय हुआ, वह 2005-06 में जारी हुए थे। प्रभारी अधिकारी आयुध व एडीएम (सिटी) अनूप कुमार का कहना है कि इन लाइसेंस की पत्रावलियां रिकार्ड में उपलब्ध नहीं हैं।
जिले के रिकार्ड में करीब 52 हजार शस्त्र लाइसेंस हैं।
नवीनीकरण में स्टांप ड्यूटी और लाइसेंस फीस अदा नहीं किए जाने की जानकारी मिली है, ऐसे में जिन मोहर व हस्ताक्षर से नवीनीकरण हुआ, उनकी भी जांच होगी।
गौरतलब है कि एसटीएफ द्वारा मुकदमे में नामजद किए गए अभियुक्तों में जिला कलक्ट्रेट का सेवानिवृत लिपिक, दो राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज और एक मीडिया कर्मी भी शामिल है। सोशल मीडिया पर अभियुक्तों को लेकर तरह-तरह की चर्चाओं का दौर जारी है। इन चर्चाओं में किसी नेटवर्क की तरफ इशारा किया जा रहा है। हथियार की खरीद में किसी राजनेता के शामिल होने की भी चर्चाएं हैं।
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