आगरा: वर्ष 2025 के दौरान वाइल्डलाइफ एसओएस ने आगरा, मथुरा और आसपास के इलाकों में 1,300 से अधिक जंगली जानवरों का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया। यह उपलब्धि ऐसे समय में सामने आई है, जब तेज़ शहरीकरण, प्राकृतिक आवासों का सिकुड़ना और चरम मौसम की घटनाएं अनेक प्रजातियों के अस्तित्व के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी हैं।
प्राकृतिक आवासों में कमी और बढ़ते मानव अतिक्रमण के कारण वन्यजीव भोजन, पानी और आश्रय की तलाश में शहरी क्षेत्रों की ओर बढ़ रहे हैं। भीषण गर्मी, सर्द हवाएं और मानसून जैसी परिस्थितियां उनकी मुश्किलें और बढ़ा देती हैं। इसी कारण वाइल्डलाइफ एसओएस की आगरा हेल्पलाइन (+91 9917109666) पर वर्षभर स्तनधारियों, सरीसृपों और पक्षियों से जुड़े सैकड़ों आपात कॉल प्राप्त हुए, जिनमें तत्काल सहायता की आवश्यकता थी।
उत्तर प्रदेश वन विभाग के सहयोग से संस्था ने पूरे वर्ष व्यापक रेस्क्यू अभियान चलाए, ताकि समय पर हस्तक्षेप हो सके और जहां संभव हो, जानवरों को सुरक्षित पुनर्वास मिल सके।
सरीसृपों का रेस्क्यू
कुल 600 से अधिक सरीसृपों को सुरक्षित निकाला गया। इनमें मगरमच्छ, मॉनिटर लिज़र्ड और सांपों की कई प्रजातियां—जैसे वुल्फ स्नेक, अजगर और कोबरा—शामिल थीं। इनमें से कई जानवर रिहायशी इलाकों, स्कूलों, व्यावसायिक परिसरों और खेतों में पाए गए थे।
स्तनधारी और पक्षी
संस्था ने 433 स्तनधारी जीवों का भी रेस्क्यू किया, जिनमें नीलगाय, हॉग डियर, लकड़बग्घा, तेंदुए का शावक, सांभर हिरण और विभिन्न प्रजातियों के बंदर शामिल हैं। इसके अलावा 295 पक्षियों को बचाया गया, जिनमें भारतीय मोर, बगुला और चील प्रमुख हैं। ये पक्षी अक्सर पर्यावास में व्यवधान, चोट, निर्जलीकरण या जाल में फंसने जैसी स्थितियों का शिकार हुए थे।
नेतृत्व की प्रतिक्रिया
वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक एवं सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा,
“2025 हमारे लिए चुनौतीपूर्ण होने के साथ-साथ प्रेरणादायक भी रहा। अप्रत्याशित मौसम और बढ़ते मानवीय दबावों के बावजूद हमारी टीम ने तेज़ और प्रभावी प्रतिक्रिया दी। यह सफलता हमारे कर्मचारियों, स्वयंसेवकों और वन विभाग के सहयोग के बिना संभव नहीं थी।”
संस्था की सह-संस्थापक एवं सचिव गीता शेषमणि ने कहा,
“हर रेस्क्यू अभियान भारत की जैव विविधता के संरक्षण की हमारी जिम्मेदारी को रेखांकित करता है। शहरी विस्तार के साथ जानवरों का मानव-प्रधान क्षेत्रों में आना बढ़ रहा है, ऐसे में उन्हें सुरक्षित मार्ग और पुनर्वास देना और भी महत्वपूर्ण हो गया है।”
डायरेक्टर, कंजरवेशन प्रोजेक्ट्स बैजूराज एम.वी. ने कहा,
“मगरमच्छों से लेकर पक्षियों और बड़े स्तनधारियों तक, हर रेस्क्यू हमारी टीम की दक्षता और समर्पण को दर्शाता है। हम न केवल बचाव और पुनर्वास पर काम कर रहे हैं, बल्कि सह-अस्तित्व और प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए भी प्रतिबद्ध हैं।”
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