आगरा: पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाले एक मामले में आखिरकार कानून का पलड़ा भारी पड़ा है। सिकंदरा थाने की हिरासत में वारंटी महिला सीमा सिकरवार के साथ कथित मारपीट और ‘थर्ड डिग्री’ के इस्तेमाल के मामले में, नामजद पुलिसकर्मियों के खिलाफ अंततः मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जिला एवं सत्र न्यायालय द्वारा राज्य सरकार की पुनरीक्षण याचिका खारिज किए जाने के बाद पुलिस महकमे को झुकना पड़ा।
न्यायालय की कड़ी टिप्पणी और खारिज हुई याचिका
विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा मुकदमा दर्ज करने के दिए गए आदेश को चुनौती देते हुए राज्य सरकार की ओर से जिला जज की अदालत में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की गई थी। गुरुवार को दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद जिला जज ने सरकार की याचिका को विधिक रूप से पोषणीय न मानते हुए खारिज कर दिया। अदालत के इस रुख के बाद पुलिस प्रशासन को न्यायालय के आदेश का अनुपालन करते हुए नामजद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करनी पड़ी।
क्या था पूरा मामला?
रुनकता निवासी सीमा सिकरवार वर्ष 2018 में थाना शाहगंज में दर्ज एक बलवा और मारपीट के मामले में वारंटी थीं। पिछले शुक्रवार को सिकंदरा पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था। महिला का आरोप है कि गिरफ्तारी के बाद रुनकता चौकी प्रभारी नीलेश शर्मा, दरोगा सुरजीत सिंह, महिला दरोगा नेहा और हेड कांस्टेबल सीमा ने उन्हें न केवल अपशब्द कहे, बल्कि जमीन पर गिराकर बेल्ट और लात-घूंसों से बेरहमी से पीटा। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके घर में भी तोड़फोड़ की।
मेडिकल रिपोर्ट बनी सबसे बड़ा साक्ष्य
जब सीमा सिकरवार को न्यायालय में पेश किया गया, तो उन्होंने अपनी चोटें दिखाईं। न्यायालय के आदेश पर गठित एक मेडिकल पैनल द्वारा उनका परीक्षण किया गया, जिसमें उनके शरीर पर आई गंभीर अंदरूनी और बाहरी चोटों की पुष्टि हुई। इसी साक्ष्य के आधार पर विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने तत्काल प्रभाव से चारों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और विभागीय जांच बैठाने का निर्देश दिया था।
विवादों से पुराना नाता है चौकी प्रभारी का
इस प्रकरण में नामजद रुनकता चौकी प्रभारी नीलेश शर्मा पूर्व में भी अपने आचरण को लेकर विवादों में रह चुके हैं। इससे पूर्व जब वे ‘एकता चौकी’ पर तैनात थे, तब भी उन पर युवकों के साथ मारपीट के गंभीर आरोप लगे थे। बार-बार लगने वाले आरोपों और इस बार मेडिकल रिपोर्ट द्वारा चोटों की पुष्टि होने के बाद, पुलिसकर्मियों के लिए कानूनी बचाव की राह मुश्किल हो गई है।
आगे की न्यायिक प्रक्रिया
मुकदमा दर्ज होने के बाद अब गेंद विवेचना अधिकारी के पाले में है। वहीं, इस मामले से जुड़े सीसीटीवी फुटेज और थाना जनरल डायरी (जीडी) को तलब करने की अर्जी पर आगामी 15 जून को सुनवाई तय है। पिछली बार पुलिस सीसीटीवी फुटेज प्रस्तुत करने में विफल रही थी, ऐसे में अब न्यायालय की अगली कार्यवाही पर सबकी निगाहें टिकी हैं। यह मामला राज्य के पुलिस प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है, जहाँ वर्दी की मर्यादा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
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