वाराणसी: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच की तल्खी अब चरम पर पहुँच गई है। गुरुवार को पत्रकारों से वार्ता करते हुए शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री को ‘कालनेमि’ करार देते हुए उनके इस्तीफे की मांग कर दी। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति वेशभूषा और नाम से कुछ और हो, लेकिन आचरण से कुछ और, उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
डिप्टी सीएम के ‘बटुक सम्मान’ को बताया राजनीति:
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक द्वारा 101 बटुकों को आवास पर सम्मानित किए जाने को शंकराचार्य ने ‘राजनैतिक स्टंट’ करार दिया। उन्होंने कहा, “101 बटुकों पर पुष्पवर्षा करना प्रयागराज के पाप को धोना नहीं, बल्कि राजनीति है। अगर पश्चाताप करना था, तो उस वास्तविक पीड़ित बटुक के पास जाना चाहिए था जिसकी चोटी खींची गई।” उन्होंने आगे कहा कि जब मुख्यमंत्री के दोनों डिप्टी सीएम ही उनकी कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं, तो योगी आदित्यनाथ को पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
11 मार्च को लखनऊ में ‘हुंकार’:
गाय को ‘राज्य माता’ का दर्जा देने के लिए दिए गए 40 दिनों के अल्टीमेटम पर शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि 20 दिन बीत चुके हैं। उन्होंने घोषणा की कि 11 मार्च को वह देशभर के धर्माचार्यों और सनातनियों के साथ लखनऊ कूच करेंगे। उन्होंने बीफ व्यापार को लेकर भी यूपी सरकार को घेरा और दावा किया कि उत्तर प्रदेश की तुलना में बंगाल में गौ-हत्या कम हो रही है।
भाजपा में ‘बगावत’ का दावा:
शंकराचार्य ने एक और बड़ा दावा करते हुए कहा कि भाजपा के 100 से अधिक पदाधिकारी, पूर्व विधायक और कार्यकर्ता गौ-रक्षा के मुद्दे पर सरकार की मंशा साफ न होने के कारण उनके संपर्क में हैं और पार्टी छोड़ रहे हैं।
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