डॉ. अरुण चाइल्ड हॉस्पिटल आगरा के 25 वर्ष पूर्ण, 25 अप्रैल को निशुल्क बाल रोग शिविर, यहां कराओ पंजीकरण

HEALTH

 

डॉ. अरुण चाइल्ड हॉस्पिटल में 25 वर्ष की सेवा का जश्न

Live Story Time

Agra, Uttar Pradesh, India, Bharat.

आगरा। शहर के प्रतिष्ठित डॉ अरुण चाइल्ड हॉस्पिटल ने अपने गौरवशाली 25 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस अवसर पर 25 अप्रैल 2026 को एक विशेष गोष्ठी और निशुल्क बाल रोग चिकित्सा शिविर का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम की जानकारी अतिथियों द्वारा पोस्टर विमोचन के माध्यम से पत्रकारों को दी गई।

बच्चों की सेहत पर विशेषज्ञों की खास चर्चा

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ अरुण जैन और पैथोलॉजिस्ट डॉ संध्या जैन ने बताया कि अस्पताल ने पिछले 25 वर्षों में निरंतर समाज सेवा की है। यहां बच्चों के इलाज की सभी सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध हैं।
डॉ अरुण जैन ने बताया कि यदि अभिभावक बच्चों के खान-पान पर सही ध्यान दें, तो कई बीमारियों में दवाओं की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। इसी विषय पर जागरूकता बढ़ाने के लिए 25 अप्रैल को सुबह 9 बजे से गोष्ठी आयोजित की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता आगरा विकास मंच के अध्यक्ष राजकुमार जैन करेंगे। इसमें चिकित्सा विशेषज्ञ महत्वपूर्ण जानकारियां साझा करेंगे।

डॉ अरुण जैन, संदेश जैन और डॉक्टर संध्या जैन

निशुल्क बाल रोग चिकित्सा शिविर का लाभ उठाएं

इसी दिन सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक निशुल्क बाल रोग चिकित्सा शिविर भी लगाया जाएगा। शिविर में बच्चों को मुफ्त परामर्श दिया जाएगा। आयोजकों ने बताया कि पहले पंजीकरण कराने वाले अभिभावकों को प्राथमिकता दी जाएगी।

यहां कराएं पंजीकरण

शिविर में भाग लेने के लिए अभिभावक निम्न स्थानों पर पंजीकरण करा सकते हैं—
डॉ अरुण चाइल्ड हॉस्पिटल (मारुति एस्टेट क्रॉसिंग के पास, शाहगंज मार्ग)
डॉ बी.के. अग्रवाल, जयपुर हाउस
डॉ सुनील शर्मा, नवदीप हॉस्पिटल
डॉ रमेश धमीजा, शाहगंज
डॉ विजय कत्याल, जयपुर हाउस आगरा

जरूरी दस्तावेज साथ लाएं

अभिभावकों से अपील की गई है कि वे बच्चों के पुराने पर्चे और जांच रिपोर्ट साथ लेकर आएं, ताकि सही और बेहतर परामर्श मिल सके। आयोजकों ने अधिक से अधिक लोगों से इस शिविर और गोष्ठी का लाभ उठाने की अपील की है।

उल्लेखनीय उपस्थित

पोस्टर विमोचन के दौरान डॉक्टर अरुण जैन डॉक्टर संध्या जैन, आगरा विकास मंच के अध्यक्ष राजकुमार जैन, प्रवक्ता संदेश जैन, आगरा विकास मंच मेडिकल प्रकोष्ठ के डॉक्टर सुनील शर्मा, डॉक्टर बी के अग्रवाल, डॉक्टर रमेश धमीजा, डॉक्टर विजय कत्याल, कमलचंद जैन, महेंद्र जैन, महेश चंद्र सोनी, जितेंद्र, नीरज, नीरज, विवेक आदि उपस्थित रहे।

संपादकीय

बचपन की सेहत: दवा नहीं, सही परवरिश का सवाल

25 साल की सेवा—एक अस्पताल, एक संदेश

आगरा में डॉ अरुण चाइल्ड हॉस्पिटल के 25 वर्ष पूरे होना केवल एक संस्थान की उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज के लिए एक आईना है। यह सफर बताता है कि समर्पित चिकित्सा सेवा किस तरह पीढ़ियों का भरोसा बनाती है। लेकिन इस उत्सव का असली सार जश्न में नहीं, उस संदेश में छिपा है जिसे डॉक्टरों ने वर्षों के अनुभव से समझा है—बच्चों की सेहत दवाओं से नहीं, जीवनशैली से बनती है।

खान-पान की अनदेखी, बीमारियों की जड़

आज का बच्चा पहले से ज्यादा सुविधाओं के बीच पल रहा है, लेकिन paradox यही है कि वह पहले से ज्यादा बीमार भी हो रहा है। जंक फूड, अनियमित दिनचर्या और स्क्रीन की लत ने बचपन की स्वाभाविक ऊर्जा को कमजोर किया है।
डॉक्टर अरुण जैन का यह कहना कि सही खान-पान से दवाओं की जरूरत कम हो सकती है, कोई साधारण सलाह नहीं, बल्कि आधुनिक जीवनशैली पर सीधा प्रहार है। सवाल यह है कि क्या हम अपने बच्चों को पोषण दे रहे हैं या सिर्फ पेट भर रहे हैं?

अभिभावकों की भूमिका—पहला और अंतिम इलाज

बच्चों की सेहत का असली नियंत्रण अस्पतालों में नहीं, घरों में होता है। माता-पिता की जागरूकता ही बच्चे की पहली सुरक्षा है।
आज जरूरत इस बात की है कि अभिभावक डॉक्टर के पास जाने से पहले अपनी आदतों की जांच करें—क्या बच्चे का भोजन संतुलित है? क्या उसकी दिनचर्या नियमित है? क्या वह पर्याप्त खेल और नींद ले रहा है?
अगर इन सवालों के जवाब नकारात्मक हैं, तो बीमारी का इलाज किसी दवा में नहीं, बल्कि व्यवहार में बदलाव में है।

निशुल्क शिविर—इलाज से ज्यादा जागरूकता का मंच

निशुल्क बाल रोग चिकित्सा शिविर जैसे आयोजन केवल इलाज का माध्यम नहीं होते, बल्कि समाज को शिक्षित करने का अवसर भी होते हैं। ऐसे शिविर यह संदेश देते हैं कि स्वास्थ्य सेवा केवल अस्पताल की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक साझी सामाजिक प्रक्रिया है।
यह पहल सराहनीय है, लेकिन इससे भी जरूरी है कि लोग इसमें भाग लेकर केवल परामर्श न लें, बल्कि उसे जीवन में उतारें।

आगे की राह—बीमारी से नहीं, स्वास्थ्य से लड़ाई

भारत जैसे देश में, जहां युवा आबादी बड़ी है, वहां बच्चों का स्वास्थ्य भविष्य की नींव है। अगर बचपन कमजोर होगा, तो आने वाला समाज भी कमजोर होगा।
अब वक्त आ गया है कि हम “इलाज” से आगे बढ़कर “रोकथाम” की सोच अपनाएं। अस्पतालों की संख्या बढ़ाने से ज्यादा जरूरी है स्वस्थ आदतों का विस्तार।

निष्कर्ष—स्वास्थ्य का असली निवेश

डॉ अरुण चाइल्ड हॉस्पिटल के 25 वर्ष हमें यही सिखाते हैं कि चिकित्सा सेवा का असली उद्देश्य दवा देना नहीं, बल्कि बीमारी को आने से रोकना है।
अगर समाज इस संदेश को समझ ले, तो शायद भविष्य में अस्पतालों की जरूरत कम और स्वस्थ बच्चों की संख्या ज्यादा होगी।
सीधी बात—बच्चों की सेहत कोई “इमरजेंसी प्रोजेक्ट” नहीं, यह रोज़ की छोटी-छोटी आदतों का “लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट” है। अब फैसला अभिभावकों के हाथ में है कि वे इस निवेश को समझते हैं या नहीं।
डॉ भानु प्रताप सिंह, संपादक

Dr. Bhanu Pratap Singh