लखनऊ: प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और बटुकों के साथ हुई कथित बदसलूकी का मामला अब उत्तर प्रदेश सरकार के भीतर एक बड़े ‘डैमेज कंट्रोल’ या फिर ‘मतभेद’ के रूप में उभर रहा है। एक तरफ जहाँ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सदन में बिना नाम लिए तीखा हमला किया, वहीं दूसरी तरफ सरकार के दोनों डिप्टी सीएम पाठक और केशव प्रसाद मौर्य का रुख मुख्यमंत्री से बिल्कुल अलग नजर आ रहा है।
ब्रजेश पाठक का ‘बटुक सम्मान’ और बड़ा संदेश:
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने अपने सरकारी आवास पर करीब 100 बटुकों को बुलाकर न केवल उन्हें सम्मानित किया, बल्कि उन पर पुष्पवर्षा कर तिलक भी लगाया। पाठक ने कड़े शब्दों में कहा, “बटुकों की चोटी खींचने वालों को पाप लगेगा।” राजनीतिक गलियारों में इस बयान को मुख्यमंत्री के रुख के विपरीत एक ‘संतुलन’ बनाने की कोशिश या फिर ब्राह्मण समाज और संत समाज की नाराजगी को दूर करने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।
सरकार में दो खेमे?
यह विवाद तब और गहरा गया जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बजट सत्र के दौरान शंकराचार्य पद की वैधता पर सवाल उठाते हुए उन्हें ‘कालनेमि’ तक कह दिया था। इसके ठीक विपरीत, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने पहले ही शंकराचार्य को ‘पूज्यनीय’ बताते हुए उनसे विवाद खत्म करने का आग्रह किया था। अब ब्रजेश पाठक का यह कदम साफ संकेत दे रहा है कि सरकार के भीतर इस मुद्दे पर राय एक जैसी नहीं है।
विपक्ष ने साधा निशाना:
इस आंतरिक कलह के बीच समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने भी सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि दूसरों से सर्टिफिकेट माँगने वालों से अगर जनता सर्टिफिकेट माँग ले, तो वे क्या देंगे? शंकराचार्य विवाद अब पूरी तरह से राजनीतिक रंग ले चुका है, जहाँ सत्ता पक्ष के भीतर ही अलग-अलग सुर सुनाई दे रहे हैं।
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