PMKVY पर CAG का बड़ा खुलासा: 95 लाख में से 90 लाख लाभार्थियों का डेटा संदिग्ध, विपक्ष ने बोला ‘स्कैम’ पर हमला

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की दिसंबर 2025 में संसद में पेश परफॉर्मेंस ऑडिट रिपोर्ट के बाद विपक्ष ने इस योजना में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और घोटाले के गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस, राजद समेत कई विपक्षी दलों का कहना है कि युवाओं को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार देने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना में हजारों करोड़ रुपये के सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है।

CAG की रिपोर्ट 2015 से 2022 के बीच लागू पीएमकेवीवाई के विभिन्न चरणों की जांच पर आधारित है। रिपोर्ट के मुताबिक योजना के क्रियान्वयन में डेटा की सत्यता, निगरानी और फंड के इस्तेमाल में गंभीर खामियां पाई गईं। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि यह योजना युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ और करदाताओं के पैसे की खुली बर्बादी बनकर रह गई।

कांग्रेस नेता और पूर्व आईएएस अधिकारी कन्नन गोपीनाथन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पीएमकेवीवाई मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना थी, लेकिन सीएजी की रिपोर्ट ने इसमें “भयंकर स्कैम” का पर्दाफाश कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि पिछले सात वर्षों में करीब 10 हजार करोड़ रुपये ऐसे लाभार्थियों को जारी किए गए, जिनके न तो सही मोबाइल नंबर थे और न ही वैध ईमेल पते।

कांग्रेस के आरोप: फर्जी ट्रेनिंग और प्लेसमेंट

कन्नन गोपीनाथन ने आरोप लगाया कि पीएमकेवीवाई के तहत ट्रेनिंग पार्टनर्स को नामांकन, सर्टिफिकेशन और प्लेसमेंट के आधार पर भुगतान किया गया, लेकिन कई मामलों में प्लेसमेंट हुआ ही नहीं। उन्होंने कहा कि केरल की एक कंपनी के ऑडिट में सामने आया कि वहां प्रशिक्षित युवाओं को नौकरी नहीं मिली, फिर भी भुगतान किया गया।

उन्होंने कुछ उदाहरण देते हुए कहा कि “नीलिमा मूविंग पिक्चर्स” नाम की कंपनी ने 33 हजार लोगों को ट्रेनिंग देने का दावा किया, जबकि यह कंपनी पिछले कई वर्षों से बंद है। वहीं जयपुर कल्चरल सोसाइटी नामक ट्रेनिंग पार्टनर ने 31 फरवरी को ट्रेनिंग आयोजित करने का रिकॉर्ड दिखाया। इस पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि “ये लोग स्कैम करने में इतने स्किल्ड हो गए हैं कि अब 31 फरवरी को भी ट्रेनिंग करवा रहे हैं।”

CAG रिपोर्ट में क्या खुलासे

सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार पीएमकेवीवाई 2.0 और 3.0 में नामांकित करीब 95 लाख युवाओं में से 90 लाख से अधिक के बैंक खातों का विवरण अधूरा, फर्जी या अमान्य पाया गया। कई मामलों में एक ही बैंक अकाउंट से हजारों लाभार्थी जुड़े दिखाए गए। एक ही फोटो कई लाभार्थियों के लिए इस्तेमाल की गई, फर्जी ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर दर्ज किए गए और 97 प्रतिशत तक असेसर डिटेल्स भी संदिग्ध पाई गईं।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कई ट्रेनिंग सेंटर या तो बंद थे या अस्तित्व में ही नहीं थे, लेकिन पोर्टल पर उन्हें सक्रिय दिखाया गया। प्रत्येक प्रमाणित उम्मीदवार को 500 रुपये का डीबीटी इंसेंटिव दिया जाना था, लेकिन कई मामलों में फर्जी खातों में ट्रांसफर दिखाकर करोड़ों रुपये के दुरुपयोग की आशंका जताई गई है। प्लेसमेंट के दावे भी कमजोर पाए गए और कई प्रशिक्षण ऐसे कौशलों पर केंद्रित थे, जिनसे वास्तविक रोजगार की संभावनाएं सीमित थीं।

राजद का आरोप: हाईकोर्ट जांच की मांग

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने भी पीएमकेवीवाई में करीब 14,400 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है। राजद के प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने कहा कि योजना के तहत 1.32 करोड़ युवाओं को प्रशिक्षित करने का दावा किया गया, लेकिन सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक 95 लाख नामांकित युवाओं में से 90 लाख का कोई ठोस विवरण ही मौजूद नहीं है और करीब पांच लाख नाम फर्जी पाए गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई कंपनियां, जिनमें रोजगार दिए जाने का दावा किया गया, कागजों में ही मौजूद थीं।

कांग्रेस ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग

कांग्रेस ने कहा है कि पीएमकेवीवाई में ट्रेनिंग, नामांकन, प्रमाणन और प्लेसमेंट हर स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है। पार्टी ने मांग की है कि सरकार इस मामले में उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराए ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो।

पीएमकेवीवाई का उद्देश्य और हकीकत

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 2015 में युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार योग्य बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। 2015 से 2022 के बीच इसके तीन चरणों के लिए लगभग 14,450 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया, जिसमें से करीब 9,261 करोड़ रुपये खर्च किए गए। लक्ष्य 1.32 करोड़ युवाओं को प्रशिक्षण और प्रमाणन देने का था, जबकि सरकार के अनुसार करीब 1.1 करोड़ युवाओं को सर्टिफिकेट दिए गए। हालांकि सीएजी रिपोर्ट और विपक्षी दलों के आरोपों ने इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

फिलहाल यह मामला देशभर में राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन गया है और आने वाले दिनों में इस पर सरकार की प्रतिक्रिया और जांच की दिशा पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

Dr. Bhanu Pratap Singh