दादा जी महाराज को परम पूज्य बाबा जी (साहब दाता दयाल) और दादी जी (बड़ी बउआ जी) का अत्यधिक लाड़-प्यार प्राप्त हुआ। यद्यपि वे अपने माता-पिता के दुलारे थे किन्तु परम पूज्य बाबा जी के तो वह आंख के तारे थे। वे हर समय परम पूज्य बाबा जी के सानिध्य में रहते। उन्हीं के साथ सोते, खेलते और घूमने जाते। परम पूज्य बाबा जी के साथ वे सत्संग में जाते। वहां शांत और अनुशासित रहते। 10 वर्ष की अल्पायु में दादाजी महाराज ने राधास्वामी मत का उपदेश ग्रहण किया। वह परम पूज्य बाबा जी को आध्यात्मिक क्रियाओं को बहुत ध्यान से देखते कि वे (बाबाजी) किस प्रकार मत्था टेकते हैं, कैसे चलते हैं, क्या वस्त्र पहनते हैं तथा इन सब बातों का अनुकरण करते। अत्यधिक प्यार व दुलार में संरक्षित होने के कारण वह अंतर्मुखी एवं कल्पनाशील हो गए। एक बार जब वे टाइफाइड से पीड़ित हुए तो उनके शरीर का तापमान बहुत बढ़ गया। इसी अवस्था में उनके मुंह से निकला-
‘हजूर महाराज के हृदय चक्र पर स्वामी जी महाराज का निवास है’।
यह वाक्य दादा जी महाराज के भविष्य में होने वाले आध्यात्मिक अनुभवों का पूर्वाभास था। वे सदैव शांत रहते। वे सहृदय और दयालु थे। (दादा की दात से साभार)
कल पढ़िए दादाजी महाराज की शिक्षा के बारे में
- Ton Casino Favori Désormais Accessible Partout en Suisse avec Bonuskong Casino - October 26, 2026
- Analiza Gier, Bonusów i Pomocy Klienta w Wonaco Casino w Polsce - October 25, 2026
- Graj w Sloty na Prawdziwe Pieniądze i Wygraj Natychmiast w Bruce Bet Casino w Polsce - October 24, 2026