एक कहावत है- मां का दूध पिया है तो यह काम करके दिखा। आप जानते हैं यह क्यों कहा जाता है, इसलिए कहा जाता है कि मां का दूध बच्चे के लिए अमृत के समान नहीं, अमृत होता है। आपको बता दें आज से विश्व स्तनपान सप्ताह शुरू हो रहा है। विश्व में स्तनपान सप्ताह हर साल अगस्त माह के पहले सप्ताह 1 अगस्त से 7 अगस्त तक मनाया जाता है। इसका उद्देश्य महिलाओं को स्तनपान एवं कार्य को दृढ़तापूर्वक एक साथ करने का समर्थन देना है| साथ ही इसका यह उद्देश्य है कि कामकाजी महिलाओं को उनके स्तनपान संबंधी अधिकार के प्रति जागरूकता प्रदान करना। यह सप्ताह केवल घरों में ही नहीं कामकाज के स्थानों व कार्यालय में भी इस प्रकार का माहौल बनाने पर बल देता है जिससे स्तनपान कराने वाली महिलाओं को किसी भी प्रकार की असुविधाएं न हो।
स्तनपान से बच्चे को लाभ
मां के स्तन में दूध पैदा होना एक नैसर्गिक प्रक्रिया है और जब तक बच्चा दूध पीता है तब तक स्तन में दूध पैदा होता रहता है। बच्चे के दूध पीना छोड़ने के पश्चात कुछ समय बाद अपने आप ही स्तन से दूध बनना बंद हो जाता है बच्चे के लिए ही नहीं मां के स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी है स्तनपान। मां का दूध बच्चे के लिए अनमोल आहार है| नवजात शिशु एवं बच्चे को पर्याप्त स्वास्थ्य सुरक्षा तथा पोषण की आवश्यकता होती है। स्तनपान शिशु की सभी आवश्यक माँग को पूरा करता है। मां का दूध बच्चे के संपूर्ण विकास के लिए पोषण का सबसे अच्छा स्रोत होता है। मां के दूध का कोई विकल्प नहीं होता है। स्तनपान एक तकनीक है, जिसे हर मां को सीखना चाहिए जैसे कि स्तनपान कैसे कराएं, स्तनपान कब कराएं, शिशु को कितनी बार स्तनपान कराएं| मां के दूध में बच्चे के लिए आवश्यक प्रोटीन, वसा कैलोरी विटामिन, लोहा, खनिज, पानी और एंजाइम पर्याप्त मात्रा में होते हैं| मां का दूध पचने में त्वरित और आसान होता है| यह बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है जो कि भविष्य में उसे कई तरह के संक्रमण से सुरक्षित करता है। यह बच्चे के मस्तिष्क के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है| यह किफायती और संक्रमणमुक्त होता है|
स्तनपान से मां को लाभ
स्तनपान बच्चे और मां के बीच भावात्मक संबंध बनाता है| मां को भी स्तनपान कराने के कई लाभ हैं| स्तनपान से स्तन व डिंब ग्रंथि के कैंसर की संभावना कम हो जाती है| यह प्रसव पूर्व खून बहने और एनीमिया की संभावना को कम करता है| यह मां को अपनी पुरानी शारीरिक संरचना वापस प्राप्त करने में सहायता करता है। स्तनपान कराने वाली माताओं के बीच मोटापा कम पाया जाता है |
साक्षी जैन को आश्चर्य
लोकस्वर की साक्षी जैन कहती हैं आज एक वर्ग की महिलाओं की बड़ी विडंबना है वह स्तनपान कराने से परहेज करती हैं। मात्र अपने को अभिजात्य वर्ग का सिद्ध करने अपनी फिगर के लिए स्तनपान नहीं कराती हैं। वह भूल जाती है कि स्तनपान कराना खुद व बच्चे के लिए कितना महत्वपूर्ण है| मुझे बड़ा अफसोस होता है कि आज के समय में जब हर डॉक्टर, मां, पत्रिकाएं, अखबार यहां तक कि गूगल स्तनपान के बारे में जागरूक कर रहा है तब भी में स्त्रियां अपने शिशु को स्तनपान से परहेज करती हैं।
राजीव गुप्ता की अपील
लोकस्वर के अध्यक्ष राजीव गुप्ता की आने वाली माताओं को एक मात्र सलाह है कि वे अपने व बच्चे के स्वस्थ जीवन व मानसिक विकास के लिए स्तनपान से परहेज ना करें। कोशिश करें कि कम से कम छह महीने बच्चे को उसके भोजन के रूप में अपना दूध पिलाएं। अगर आप ऐसा करते हैं तो अपने परिवार के साथ आप देश को भी एक स्वस्थ शिशु देंगे। आप अपने आसपास की माताओं को भी बताएं कि स्तनपान अमृत है, जो केवल और केवल एक माँ ही अपने बच्चे को दे सकती|
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