“कोरोना काल के उपरांत इनोवेशन व पेटेंट व्यवस्था के माध्यम से आत्मनिर्भर उद्यमिता का महत्व” विषय पर वेबिनार का आयोजन
Agra (Uttar Pradesh, India)। पर्यावरण (Environment) संरक्षण को लेकर काम करने वाली संस्था “नवयुग” द्वारा आयोजित वेबिनार (Webinar) सीरीज के दूसरे व्याख्यान में आज आर.बी.एस. कॉलेज (RBS college Agra) के वनस्पति विज्ञान विभाग की डॉ. सीमा भदौरिया (Dr Seema bhadauria) ने अपने विचार रखे। उन्होंने इनोवेशन (Innovation) आधारित शोध को आज की मांग बताया। उन्होंने कहा कि अधिकांशतः शोध सिर्फ लैब (Lab) तक सीमित रह जाता है लेकिन जब तक उसे लैब से लैंड (Land) तक ना पहुंचाया जाए तब तक उसे पूर्ण नहीं कह सकते।
“आत्मनिर्भर” बनाने की प्रक्रिया चल रही
डॉ. भदौरिया ने कहा कि वर्तमान समय में जब नौकरियों पर एक बड़ा संकट है तब समाज और बाजार की आवश्यकताओं के आधार पर इनोवेटिव तरीकों से खुद को “आत्मनिर्भर” बनाने की प्रक्रिया चल पड़ी है। भारत सरकार की ओर से भी विभिन्न योजनाओं द्वारा आर्थिक और तकनीकी मदद ऐसे इनोवेटिव विचारों को प्रदान किया जा रहा है।

किसान अपने खेत की मिट्टी खुद जांचें
डॉ भदौरिया ने बताया कि किस प्रकार उनकी लैब में तैयार मिट्टी की गुणवत्ता जांचने की किट विकसित की गई जिसके द्वारा कोई भी किसान अपने खेत की मिट्टी की जांच खुद ही कर सकता है। “फर्टी चेक” के नाम से उपलब्ध यह किट बहुत सामान्य दाम पर बाजार में उपलब्ध है । इसके अलावा उन्होंने अपने द्वारा विकसित किसी प्रोडक्ट के पेटेंट कराने की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया।

65 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया
कार्यक्रम का संचालन नवयुग संस्था की डॉ. रेणुका सैनी ने किया। उन्होंने नवयुग द्वारा चलाई जा रहे विभिन्न पर्यावरण आधारित गतिविधियों के बारे में भी बताया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. नरेंद्र ने धन्यवाद ज्ञापन दिया । कार्यक्रम में करीब 65 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ शशांक शर्मा, सौरभ जैन, डॉ. नरेंद्र सिसोदिया, धर्मेंद्र चौहान आदि की मुख्य भूमिका रही।
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