वर्तमान में उत्तर प्रदेश के साथ साथ देश के 5 बड़े राज्यों में चुनाव होने हैं। जिसमें उत्तर प्रदेश राजनीतिक दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण है। दिल्ली की सत्ता का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाता है इसलिए उत्तर प्रदेश राजनीतिक सफर का अखाड़ा बना हुआ है। इसमें कुछ अपनी विरासत को पाने की दौड़ में है तो कुछ के सामने अपने अस्तित्व को यथावत रखने की चुनौती है। चुनावी मुद्दे हमेशा हावी रहते हैं। सभी दल अपने- अपने अनुसार वोटर का ध्रुवीकरण करने का प्रयास करते रहे हैं। चुनाव प्रचार करने के लिए सभी दल विशेष प्रकार की चुनावी योजना बनाना एवं चुनाव रणनीतिकारों का सहारा भी लेते रहे हैं। सभी दल सत्ता तक पहुंचने के लिए विभिन्न प्रकार के माध्यमों का प्रयोग भी करते रहे है।
वर्ष 2014 में एनडीए की सरकार बनने एवं विशाल जनमत प्राप्त करने में सोशल मीडिया की बड़ी भूमिका रही। आज बड़ी संख्या में देश की जनता सोशल मीडिया पर सक्रिय है। देश का युवा वर्ग बड़ी संख्या में जुड़ा हुआ है। इसलिए सभी दल इसे अपना सहारा बनाए हुए है। इस प्लेटफॉर्म का प्रयोग सभी राजनीतिक दल के समर्थकों द्वारा जिस प्रकार से किया जा रहा है निशित रूप से आने वाले दिनों में देश की राजनिति के लिए एवं युवा वर्ग के लिए चिंता का विषय है।
वैसे तो राजनीति में हिंसा, हत्या, बूथ डंप करना, सरकार बनाने के लिए विधायक और सांसदों की खरीद-फरोख्त होती रही है, लेकिन आज जिस प्रकार से राजनीतिक दलों के बड़े नेताओं के वीडयो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड किये जा रहे हैं, ये समाज और आने वाली राजनीति के लिए चिंता का विषय है। चूंकि भारत विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में जाना जाता है, इसलिए यदि इस प्रकार के प्रचार को नहीं रोका गया तो निश्चित रूप से सोशल मीडिया का रूप विकृत हो जाएगा।
डॉ. जीवन कुमार
सहायक प्राध्यापक, कला विभाग
मंगलायतन विश्वविद्यालय, इगलास, अलीगढ़
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